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7 हजार करोड़ के टेंडर को लेकर बीडी कल्ला और प्रमुख सचिव राजेश यादव की ठनी

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विभागीय टेंडरों को लेकर मंत्री और सचिवों के बीच विवाद और शीतयुद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब घर घर सरकारी नल से पानी पहुंचाने के लिए होने वाली 7 हजार करोड से ज्यादा की टेंडर प्रक्रिया को लेकर जलदाय मंत्री बीडी कल्ला और प्रमुख सचिव राजेश यादव के बीच शीत युद्ध शुरू हो गया है। ऐसी स्थिति में प्रदेश भर में कई महीनों से जल जीवन मिशन के तहत टेंडर प्रक्रिया पर अघोषित रोक लगी हुई है। क्योंकि मंत्री अपनी तरह से टेंडर प्रक्रिया चाहते हैं और प्रमुख सचिव अपनी तरह से। हांलाकि मंत्री और सचिव ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर किसी तरह के मतभेदों को लेकर साफ तौर पर इंकार किया है।

असल में वित्तीय वर्ष 20-21 में जल जीवन मिशन के तहत 7 हजार करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत है और 20 लाख पेयजल कनेक्शन होने हैं। विभाग के सूत्रों की माने तो जलदाय मंत्री बीडी कल्ला चाहते हैं कि टेंडर प्रक्रिया जिला स्तर पर की जाए। जिससे ज्यादा से ज्यादा कॉन्ट्रेक्टर की भागीदारी हो और मिशन भी जल्दी पूरा हो।

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दूसरी ओर विभाग के प्रमुख सचिव राजेश यादव का मानना है कि अगर जिला स्तर पर टैंडर होने से टेंडर प्रक्रिया लंबी होगी। अगर रीजन के हिसाब से करते हैं तो केवल 11 रीजन के हिसाब से ही टेंडर प्रक्रिया जल्दी पूरी कर ली जाएगी। टेंडर प्रकिया को लेकर चल रहे इस शीतयुद्ध के कारण जल जीवन मिशन के टेंडर नहीं हो पा रहे हैं और घर घर सरकारी नल से पानी पहुंचने की कवायद धीमी हो गई है।

मंत्री और अधिकारी के बीच यह विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले भी पर्यटन विभाग में लाइट एंड साउंड शो में हुए टैंडरों को लेकर पूर्व पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह और पर्यटन निगम एमडी में विवाद हो चुका है। विश्वेन्द्र सिंह के विरोध के बाद पर्यटन निगम के एमडी केबी पांडया को पद से हटा दिया गया और टेंडर निरस्त किया गया।

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हालांकि जलजीवन मिशन के टेंडर में हो रहे तथाकथित विवाद से मंत्री और प्रमुख सचिव दोनों ने साफ तौर पर इनकार किया है। जहां जलदाय मंत्री बी डी कल्ला का कहना है कि टैंडर प्रकिया को लेकर अब कोई विवाद नहीं है। वहीं जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव राजेश यादव कहते हैं कि अभी प्रक्रिया पर विचार विमर्श ही चल रहा है, इसलिए टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद की बात सही नहीं है।