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बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की

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राजस्थान की राजनीति में बहुतजन समाजवाजी पार्टी की सुप्रीमो मायावती भी दिलचस्पी लेती दिखाई दे रही हैं. कांग्रेस-बीजेपी और पायलट खेमे के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के दौर में मायावती की एंट्री होने से स्थिति रोचक हो गई है. इस बीच मायावती ने राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए.

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, ”राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले दल-बदल कानून का खुला उल्लंघन व बीएसपी के साथ लगातार दूसरी बार दगाबाजी करके पार्टी के विधायकों को कांग्रेस में शामिल कराया. अब जग-जाहिर तौर पर फोन टेप कराके इन्होंने एक और गैर-कानूनी व असंवैधानिक काम किया है.”

मायावती ने कहा कि राजस्थान में लगातार जारी राजनीतिक गतिरोध, आपसी उठा-पठक व सरकारी अस्थिरता के हालात का वहां के राज्यपाल को प्रभावी संज्ञान लेकर वहां राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करनी चाहिए, ताकि राज्य में लोकतंत्र की और ज्यादा दुर्दशा न हो.

मायावती ने मांगा था गहलोत से इस्तीफा

मालूम हो कि राजस्‍थान में जब अशोक गहलोत के नेतृत्‍व वाली सरकार बनी थी तब बीएसपी के छह विधायक सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे. इन विधायकों को कांग्रेस में शामिल करा लिया गया. विधायकों ने सोनिया गांधी से मिलकर पार्टी की औपचारिक सदस्यता ले ली थी. बीएसपी का मानना रहा कि कांग्रेस ने लालच-प्रलोभन देकर उसके विधायकों को तोड़ा है. बीएसपी ने कांग्रेस के इस कदम की आलोचना की थी और मायावती ने अशोक गहलोत से इस्तीफा मांगा था.

बीजेपी चाहती है सीबीआई जांच

इससे पहले राजस्थान में कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े कथित ऑडियो टेप की बीजेपी ने सीबीआई जांच की मांग की है. साथ ही बीजेपी ने कांग्रेस पर कई सवाल भी उठाए हैं. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने पूछा, क्या आधिकारिक रूप से फोन टैपिंग की गई? क्या टैपिंग संवेदनशील और कानूनी विषय नहीं है? क्या कांग्रेस ने राजस्थान में अपनी सरकार बचाने के लिए गैर संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल किया? क्या फोन टैपिंग के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन किया गया? क्या राजस्थान में कानून को ताक पर रखकर सरकार चलाई जा रही है? बीजेपी ने ये सवाल सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अशोक गहलोत से किए?

मालूम हो कि सचिन पायलट खेमे के अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ खुलकर आने के बाद से राजस्थान में राजनीतिक उठा-पठक शुरू हुई है. आरोप-प्रत्यारोप के दौर में मामले अब राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. फिलहाल बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप मढने में व्यस्त हैं जबकि पायलट खेमा मानेसर के रेसॉर्ट में बैठा अपनी बारी का इंतजार कर रहा है.