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कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन का पहला पड़ाव सफल, ट्रायल में मिले अच्छे नतीजे

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भारत में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है. कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन का पहला पड़ाव सफलतापूर्वक पार कर लिया गया है.

वैक्सीन को लेकर पीजीआई रोहतक से एक अच्छी खबर सामने आई है. जानकारी के मुताबिक पीजीआई रोहतक में कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल का पहला फेज खत्म हो चुका है. पीजीआई के डॉक्टर्स का दावा है कि अब तक पहले फेज में ह्यूमन ट्रायल सफल और सुरक्षित रहा है.

81 लोगों पर ह्यूमन ट्रायल

पीजीआई में डॉक्टर्स की टीम ने 81 लोगों पर कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल किया है. बताया जा रहा है कि देश में सबसे ज्यादा लोगों पर को-वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल पीजीआई रोहतक में ही किया गया है.
पहले फेज में वैक्सीन की डोज 18 से 55 वर्ष के लोगों को दी गई है.

सितंबर में दूसरा फेज

पीजीआई रोहतक में कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल का दूसरा फेज सितंबर माह के पहले सप्ताह में शुरू होगा.
दूसरे फेज में लोगों को भाग लेने की अपील की गई है.
इसके बाद अब तक 300 लोगों का फेज टू के ह्यूमन ट्रायल के लिए पंजीकरण हो चुका है.

छह शहरों में चल रहा ट्रायल

भारत बायोटेक और जायडस कैडिला की वैक्सीन का छह शहरों में ह्यूमन ट्रायल चल रहा है. भारत के 12 शहरों में 375 वॉलनटिअर्स पर कोरोना वायरस वैक्सीन का टेस्ट किया गया. हर एक वॉलनटिअर को वैक्सीन के दो डोज दिए जा चुके हैं. अब उनके ऊपर नजर रखी जा रही है.

सुरक्षित कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की इस दौड़ में भारत भी शामिल है
सरकार खुद सारे घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है. कोवाक्सिन भारत का पहला वैक्सीन है और भारत बायोटेक द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के सहयोग से इसे विकसित किया गया है.

रूस ने वैक्सीन बनाने का किया है दावा

उधर रूस ने दावा किया है कि उसने कोरोना की वैक्सीन बना ली है.
हालांकि कई वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इसे सुरक्षित नहीं मान रहे क्योंकि रूस ने यह जल्दबाजी से तैयार किया है.
हालांकि रूस ने सभी खबरों का खंडन किया है.
अब वह वैक्सीन के उत्पाद की तैयारी कर रहा है.