Rajasthan Exclusive > राजस्थान > प्रदेश के रेगिस्तान एक बार फिर आए चर्चा में, अब पानी के मिल रहे भंडार

प्रदेश के रेगिस्तान एक बार फिर आए चर्चा में, अब पानी के मिल रहे भंडार

0
181
  • तेल और गैस के पहले मिले थे अथाह भंडार

  • राजस्थान का रेतीले धार जल के लिए तरस रहा था

जयपुर: प्रदेश के रेगिस्तान एक बार फिर से चर्चा में आए हुए है। इस बार पानी के भंडार मिल रहे है।

जबकि इससे पहले राजस्थान के रेतीले धार जल के लिए तरस रहा था।

इस बीच अब रेगिस्तान में पानी की किल्लत से निजात मिलेगा।

इससे पहले यहां पर लोग और जानवर बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाते थे।

पूरे देश में चर्चित राजस्थान के रेगिस्तान के रेतीले धारों में तेल और गैस केअथाह भंडार मिला है।

भूगर्भ वैज्ञानिकों द्वारा की गई खोज में पाक सीमा से सटे प्रदेश के बाड़मेर जिले के माडपुरा बरवाला में पानी का छोटा सागर मिला है जिसमें 4 हजार 800 खबर लीटर पानी मौजूद है।

पानी का यह भंडार बाड़मेर से जालौर जिले तक फैला हुआ है। भूगर्भ में मौजूद यह पानी खारा है। इसमें लवणीयता अधिक है।

बनाया जा सकता है पीने योग्य

वैज्ञानिकों के अनुसार यदि खाड़ी देशों की तर्ज पर इस पानी को पीने योग्य बनाया जा सकता है।

यह पानी 10 लाख की आबादी की कई साल तक प्यास बुझा सकता है।

केयर्न एनर्जी लंबे समय से रेगिस्तान में तेल और गैस की खोज कर रही है।

इस खोज के दौरान पानी का खजाना मिला है।

सामान्य तौर पर पेयजल में लवण की मात्रा 1000 मिलीग्राम प्रति लीटर तक मान्य होती है लेकिन रेगितस्तान में मिले पानी के भंडार में न्यूनतम 5000 से 20,000 मिलीग्राम प्रति लीटर से भी ज्यादा है।

जल संसाधन विभाग व केयर इंडिया एनर्जी के अधिकारियों ने कहा कि अनुमान से कहीं ज्यादा जल का यह भण्डार है।

राज्य के बाड़मेर-सांचौर बेसिन क्षेत्र 3111 वर्ग किमी में फैला हुआ है।

यहां साल, 2004 में देश की सबसे बड़ी तेल खोज मंगला हुई और इसके बाद 38 तेल कुओं से तेल उत्पादन हो रहा है।

प्रतिदिन यहां 1.75 लाख बैरल तेल उत्पादित हो रहा है जो 2022 तक रिफाइनरी बनने तक 5.5 लाख बैरल तक पहुंच जाएगा।

क्रूड ऑयल 750 से 2000 मीटर तक की गहराई पर मिला है।

केन्द्र सरकार करें काम

राजस्थान के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी का कहना है कि केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय को इस दिशा में काम करना चाहिए, जिससे जरूरतमंदों को पानी मिल सके।

भू-वैज्ञानिक अनिल पालीवाल के अनुसार पेट्रो भौतिक डेटा,भूकंपीय सर्वेक्षण और विस्तृत हाइड्रो जियोलॉजिकल जांच के आधार पर केयर्न ऑयल एंड गैस कंपनी ने बाड़मेर बेसिन में थूम्बली जल भंडारों की खोज की है।

बाड़मेर जिले के बायतु के पास माडपुरा बरवाला इलाके में मिले इस पानी का फैलाव बायतु, शिव, बाड़मेर, गुड़ामालानी से लेकर जालौर जिले के सांचौर और कुर्द तक है।

जमीन की सतह से इसकी गहराई 350 से 1500 मीटर तक है।