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आबकारी विभाग ने अगस्त 2020 में 819 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया

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लॉकडाउन हटने के बाद आबकारी विभाग ने राजस्व अर्जन में कमाल का प्रदर्शन किया है.

कोरोना के व्यापक असर के बाद भी आबकारी विभाग ने जून जुलाई और अगस्त के महीने में रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है.

कोरोना संक्रमण के व्यापक प्रभाव का असर हर ओर देखने को मिल रहा है.

ऐसे कठिन समय में भी आबकारी बेहतर प्लानिंग से कमाल का प्रदर्शन कर रहा है.

वित्तीय वर्ष में 12500 करोड़ के भारी भरकम टारगेट को पूरा करने की जिम्मेदारी आबकारी विभाग के पास है.

लेकिन लॉकडाउन के कारण जहाँ अप्रैल के महीने में शराब की दुकानें बंद रहीं तो वहीं मई में भी कोरोना से शराब व्यवसाय प्रभावित रहा.

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लॉकडाउन हटने और जनजीवन सामान्य होने के बाद आबकारी विभाग के सामने अप्रैल और मई महीने के नुकसान की भरपाई की भी चुनौती थी.

जिससे विभाग ने अच्छी तरह से पार पाई है.

अतिरिक्त मुख्य सचिव निरंजन आर्य और एफएसआर डॉ पृथ्वी की मॉनीटिरिंग में आबकारी आयुक्त जोगाराम और उनकी टीम ने जुलाई और अगस्त महीने में रिकॉर्ड राजस्व हासिल किया है.

इस वित्तीय वर्ष की बात करें तो विभाग अभी तक 3301 करोड़ का राजस्व हासिल कर चुका है.

कुल राजस्व

  • अप्रैल-अगस्त 2019 तक 3,606 करोड़ रुपए का राजस्व
  • अप्रैल से 2020 अब तक 3,301 करोड़ रुपए का राजस्व

आबकारी विभाग के अफसरों के सामने मौजूदा वित्तीय वर्ष में 12 हजार 500 करोड़ रुपये का भारी भरकम राजस्व लक्ष्य हासिल करने के बड़ी चुनौती है.

इस टारगेट को अचीव करने के लिए विभाग को इसी रफ्तार से काम करना होगा.

आबकारी मुख्यालय से मिले अधिकृत आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में आबकारी मद से राज्य सरकार को कुल 9 हजार 600 करोड़ रुपये का राजस्व मिला.

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11 हजार करोड वसूली का कोरोना संकट की वजह से मार्च 2020 के आखिरी हफ्ते से 3 मई तक करीब 41 दिनों के लॉकडाउन से अकेले आबकारी मद से 1000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है.

इस नुकसान की भरपाई के लिए प्रदेश सरकार ने अंग्रेजी शराब और बीयर के दामों में बढ़ोत्तरी की है.

इस बढ़ोत्तरी से आबकारी विभाग को 300 करोड रूपए की अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी.

कोरोना काल में आबकारी विभाग के सामने कई चुनौतियां

होटल-बार खोलने की अनुमति तो मिली लेकिन पर्यटक नहीं पहुंच रहे देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या का ग्राफ लगातार गिर रहा.

विवाह समारोह और कॉरपरेट मीटिंग भी नहीं हो रही है.

बड़े शहरों से काफी लोग पलायन कर चुके हैं

कोरोना काल की इन चुनौतियों के बीच भी जिस तरह से आबकारी विभाग ने राजस्व अर्जन में रफ्तार पकड़ी है वह काबिले तारीफ़ है.

आबकारी आयुक्त जोगाराम भविष्य की प्लानिंग भी कोरोना को ध्यान में रखखर ही तैयार कर रहे हैं.

ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले महीनों में विभाग इसी तरह से प्रदर्शन जारी रखेगा.