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शिक्षा विभाग के 4,05,633 कार्मिक झेलेंगे वेतन कटौती मार

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  • गुरुजी को झेलनी पड़ेगी दोहरी मार

  • शिक्षको के वेतन से प्रतिमाह 1 व 2 दिन के वेतन कटौती करने का आदेश

राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवीन कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारी एवं शिक्षक संगठनों की सहमति के बिना ही मनमाने ढंग से अनिश्चित काल के लिए प्रतिमाह वेतन कटौती के आदेश पर असहमति जताते हुए अपना विरोध प्रदर्शित किया है।

शिक्षकों (Education department news) का कहना है कि राज्य सरकार ने कोरोना वारियर्स मानते हुए न्यायिक विभाग, पुलिस व चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों को इस कटौती से मुक्त रखा है. जबकि शिक्षको के वेतन से प्रतिमाह 1 व 2 दिन के वेतन कटौती करने का आदेश दिया है.

जबकि शिक्षक (Education department news) कोरोना संकट प्रारम्भिक काल से ही राज्य सरकार के निर्देशानुसार निरन्तर डृयूटी पर है। राज्य सरकार का यह आदेश भेदभाव पूर्ण एवं शिक्षकों के स्वाभिमान व कर्तव्यनिष्ठा का अपमान है।

इसके अतिरिक्त मार्च 2020 के 16 दिन के स्थगित वेतन तथा उपार्जित अवकाशों के नगदीकरण पर रोक लगाने के मनमाने आदेश जारी करने से राजस्थान का समस्त शिक्षक वर्ग (Education department news) आक्रोशित है और राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय राज्य सरकार के इस कदम पर अपना तीव्र विरोध प्रकट करता है।

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संगठन के प्रदेश सचिव (प्राथमिक) चन्द्रप्रकाश शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी से उत्पन्न हुई आर्थिक तंगहाली में निरन्तर बढ़ रही महंगाई से शिक्षकों (Education department news) का गुजर-बसर करना अत्यन्त मुश्किल हो गया है।

अपने परिवार के जीविकोपार्जन के लिए वह अपने मासिक वेतन पर पूर्णतया निर्भर है। ऐसे में सौतेले व भेदभावपूर्ण तरीके से वेतन कटौतियाँ, वेतन भत्ते स्थगित करना अन्यायपूर्ण कदम है।

शिक्षको (Education department news) के पास वेतन के अतिरिक्त कोई आय नहीं होती तथा प्रत्येक वेतनभोगी कर्मचारी अपने वेतन के अनुसार जीवन स्तर व भविष्य की योजना तैयार करता है। इस आधार पर शिक्षको ने मकान, वाहन शिक्षा, बीमा किश्त आदि लोन ले रखे हैं।

जुलाई 19 के बाद मंहगाई भत्ते में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं किये जाने एवं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार बढ़ती मंहगाई के कारण तुलनात्मक रूप से शिक्षको (Education department news) की आर्थिक क्षमता कम हुई है।

अतः वेतन कटौती के आदेश वापस लिए जावे एवं स्थगित वेतन का भुगतान कर शिक्षको (Education department news) को राहत प्रदान की जावे ताकि राज्य कर्मचारियों में सरकार के प्रति विश्वास बना रहे।

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कोविड 19 महामारीं के नाम पर शिक्षको के वेतन से कटौति व अन्य भुगतानों पर रोक लगाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के विपरीत है। ऐसे में वित्तीय आपातकाल घोषित किये बिना वेतन की कटौती करने संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है।

हाल ही में दिनांक 11 अगस्त 2020 को आन्ध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि वित्तीय आपातकाल घोषित किये बिना वेतन स्थगन या कटौती करना संविधान के विपरीत है।

इस क्रम में राज्यभर में संगठन की समस्त उपशाखाओं द्वारा संबंधित उपखंड अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री,शासन सचिव एवं शिक्षा मंत्री महोदय को इस सम्बन्ध में 07 सितंबर 2020 को ज्ञापन सौंपे गये।

दिनांक 08 सितंबर 20 से 15 सितंबर 20 तक शिक्षको द्वारा ई-मेल कर कटौतियों का विरोध किया जा रहा है। दिनांक10 सितंबर 2020 को काली पट्टी बाँधकर राज्य के लाखों शिक्षको ने विरोध दर्ज करवाया ।

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संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सम्पत सिंह एवं महामंत्री अरविन्द व्यास के निर्देशानुसार 13 सितम्बर 2020 को प्रत्येक संभाग स्तर पर प्रेस वार्ता के जरिये संगठन के मत को प्रस्तुत करते हुए वेतन भत्तो को स्थगित करने व प्रतिमाह वेतन कटौती के आदेश वापस लिये जाने की माँग रखी गई।

सरकार द्वारा इस बारे में कोई राहत नहीं दिये जाने पर संगठन की स्थाई समिति द्वारा निर्णय कर आन्दोलन के आगामी चरण तय कर आन्दोलन को उग्र किया जावेगा।