Rajasthan Exclusive > राजस्थान > जयपुर संभाग का फीडबैक शुरू, पायलट कैम्प पर टिकी है सबकी निगाहें

जयपुर संभाग का फीडबैक शुरू, पायलट कैम्प पर टिकी है सबकी निगाहें

0
181

जयपुर: फीडबैक कार्यक्रम का आज गुरुवार को दूसरा दिन है। माकन आज जयपुर संभाग के जिलों के कांग्रेस नेताओं से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जिलेवार फीडबैक ले रहे हैं। सुबह 10.15 बजे से इसकी शुरूआत से जयपुर शहर के नेताओं की बैठक से हुई। इसके बाद 11 बजे जयपुर देहात की बैठक हुई। 12 बजे अलवर और 12.45 बजे से झुंझुनूं के नेताओं से चर्चा होगी। दोपहर बाद 3 बजे सीकर और 4 बजे दौसा जिले के कांग्रेस नेताओं से संवाद होगा।

जयपुर शहर से करीब 80 नेता आए

फीडबैक के लिए सबसे ज्यादा नेता जयपुर शहर और जयुपर देहात से ही आए क्योंकि जयपुर जिले में ही सबसे ज्यादा पार्टी पदाधिकारी रहते हैं। जयपुर शहर से करीब 80 और जयपुर देहात से 70 नेता फीडबैक कार्यक्रम में बुलाए गए। बाकी हर जिले से 50-50 के करीब नेताओं को बुलाया गया है। इनमें हर जिले से विधायक, विधायक उम्मीदवार, सांसद उम्मीदवार, एआईसीसी पदाधिकारी और सदस्य, पूर्व पीसीसी पदाधिकारी, निवर्तमान जिलाध्यक्ष, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, पीसीसी सदस्य और सहवृत सदस्य समेत प्रकोष्ठों के निवर्तमान प्रदेशाध्यक्षों को बुलाया गया है।

पायलट कैम्प पर निगाहें

जयपुर संभाग के फीडबैक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सचिन पायलट कैम्प के नेता भी आए। पायलट के पुराने निर्वाचन क्षेत्र दौसा से भी बड़ी संख्या में नेता फीडबैक देने आएंगे। पायलट कैम्प के नेताओं के रुख पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। अजमेर संभग के फीडबैक कार्यक्रम के दौरान जिस तरह पायलट कैम्प के समर्थकों ने नारेबाजी की उसके बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हैं। फीडबैक कार्यक्रम में सत्ता खेमे और पायलट कैम्प के नेताओं के रुख पर कांग्रेस की आगे की सियासत निर्भर करेगी।

पायलट कार्यकर्ताओं में पकड़ करेंगे मजबूत

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थकों को एकजुट करने की कवायद में जुटे हैं।

उन्होंने अपने समर्थकों से टेलिफोन पर संपर्क साधना शुरू कर दिया हैं।

इसके साथ ही पायलट के खास विधायक लगातार कार्यकर्ताओं से संपर्क साध रहे हैं।

माना जा रहा है, कि पायलट प्रदेश की यात्रा करेंगेऔर प्रदेश के सभी 33 जिलों का दौर करके अपने समर्थकों से बात करेंगे तथा अपनी पकड़ को और अधिक मजूत करने का कार्य करेंगे।

इसकी शुरूआत पूर्वी राजस्थान से होगी।

पूर्वी राजस्थान के आधा दर्जन जिलों में पायलट की पकड़ मजबूत है।

इन जिलों में गुर्जर और मीणा मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं।

इनमें टोंक, दौसा,करौली,सवाईमाधोपुर,भरतपुर व अलवर जिले शामिल है।

पायलट फिलहाल सरकार में है और न ही संगठन में हैं।

अभी वे कांग्रेस के नेता और विधायक जरुर हैं।

ऐसे में पायलट के इन दौरों के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।

क्या पायलट बगावत और घर वापसी के बाद जनता के बीच अपने समर्थन का पारा नापने के लिए दौरे करेंगे या दौरों से जनसमस्याएं सुनकर गहलोत और अपनी ही पार्टी की सरकार पर जनता के काम का दबाब बनाएंगे।

फिलहाल पायलट ने इस पर अपनी रणनीति साफ नहीं की है।

पायलट की इस मंशा से साफ है कि उनकी घर वापसी से संघर्ष विराम जरुर हुआ लेकिन शीत युद्ध खत्म नहीं हुआ है।

कांग्रेस आलाकमान ने दोनों के बीच संतुलन और समन्वय की ठोस कोशिश नहीं की तो भविष्य में भी किसी संकट से इंकार नहीं किया जा सकता।