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JEE मैन और NEET परीक्षा को लेकर मचा घमासान

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  • आज प्रदेश के साथ ही देशभर में हो रहा विरोध

कोरोना वायरस महामारी के बीच JEE और NEET की परीक्षा को लेकर देश में घमासान मचा हुआ है। जहां एक तरफ परीक्षा सितंबर में करवाए जाने का विरोध हो रहा है वहीं दूसरी ओर एनटीए ने बुधवार को नीट का एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया। ऐसे में सरकार ने एक तरह से अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है कि परीक्षा किसी भी हालत में संपन्न होगी जबकि नीट और जेईई की परीक्षा देने वाले लाखों छात्र अपनी जान की जोखिम का हवाला देकर इसका विरोध कर रहे हैं। हालांकि कुछ पेरेंट्स और छात्र इसके समर्थन में भी हैं और उनका कहना है कि परीक्षा करवाना उचित है नहीं तो उनका करियर प्रभावित होगा।

कोरोना ने अटकाया था

ऐसा नहीं है कि पहली बार ही परीक्षा की तारीख घोषित की गई है और पहली बार ही इसे टालने की मांग उठ रही है बल्कि इसके पहले भी परीक्षा की तारीख को दो बार टाला जा चुका है। पहले परीक्षा को मई में करवाया जाना था लेकिन उस वक्त कोरोना जोरों पर था। साथ ही लॉकडाउन 1.0 के बाद लॉकडाउन 2.0 लागू था। देश में लगभग सब कुछ बंद था। लिहाजा परीक्षा को टाल जुलाई में करवाने का फैसला किया गया। सरकार को लग रहा था कि जुलाई तक कोरोना के प्रकोप से मुक्ति मिल जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और परीक्षा को फिर से टालना पड़ा। अब परीक्षा की तारीख सितंबर में घोषित की गई है। अब भी रोजाना देश में कोरोना के हजारों मामले सामने आ रहे हैं तो ऐसे में परीक्षा का काफी विरोध हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये तर्क

परीक्षा को टालने की याचिका खारिज करते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा था कि कोविड-19 के समय में भी जिंदगी चलती रहनी चाहिए। अगर परीक्षाएं टाल दी जाएंगी तो क्या यह देश का नुकसान नहीं होगा। छात्रों को पूरा एक एकेडमिक ईयर खराब हो जाएगा और स्टूडेंट्स के करियर को काफी नुकसान पहुंचेगा। एनटीए ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि परीक्षा के दौरान छात्रों के स्वास्थ्य की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इस पर भी कोर्ट ने गंभीरता से विचार किया। यह बात भी ध्यान देने वाली है कि परीक्षा को कैंसिल करने वाली याचिका के साथ ही परीक्षा को करवाए जाने के पक्ष में भी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में पड़ी थी।

सरकार ने यह कहा

सरकार का कहना है कि काफी छात्रों और पेरेंट्स का ही दबाव परीक्षा करवाने को लेकर है। एक इंटरव्यू में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ये बात कही। उनका कहना था परीक्षा करवाने को लेकर छात्रों और पैरेंट्स का काफी दबाव है फिर कोर्ट में भी जो पक्ष सरकार ने पक्ष रखा था उसमें भी छात्रों के भविष्य का हवाला दिया गया था। साथ ही ये भी कहा गया था कि परीक्षा के दौरान गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सुझाए गए सारे सुरक्षा उपायों को अपनाया जाएगा। कोर्ट में परीक्षा करवाने को लेकर पड़ी याचिका भी इस ओर इशारा करती है कि सरकार के ऊपर एग्जाम करवाने का दबाव हो सकता है।

सुरक्षा के लिए गाइडलाइन

इस बीच परीक्षा करवाए जाने को लेकर एनटीए ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी जारी कर दिया है। इसके तहत परीक्षा केंद्रों पर किस तरह से छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी यह बताया गया है। इसके तहत हर स्टूडेंट की प्रवेश से पहले थर्मल स्कैनिंग की जाएगी। जिन भी छात्रों का तापमान ज्यादा पाया जाएगा उन्हें अलग कमरे में बैठाया जाएगा। इसके अलावा छात्रों को मास्क लगा कर आना होगा और हाथ में ग्लव्स भी पहनना होगाण् पानी की बोतल खुद ही लानी होगी ताकि किसी भी तरह से संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। गल्व्स निकालने पर भी उसे उचित स्थान पर ही फेंकना होगा। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग को मेनेटेन करने के लिए नीट में सेंटर्स की संख्या भी बढ़ा दी गई है।

आज छात्रों का घर से विरोध

आज नीट और जेईई परीक्षा के विरोध में देशभर के छात्र घर से ही विरोध कर रहे है। इस दौरान वे माथे पर व हाथों में काले पट्टे बांध रखी है और घर से काले झंडे दिखा रहे है। साथ ही काले मास्क पहनकर और अपनी प्रोफाइल पिक्चर को काली करके भी विरोध कर रहे है। इससे पहले सोशल मीडिया पर भी परीक्षा करवाने के खिलाफ काफी विरोध हो चुका है।