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प्रदेश में भीषण सूखे का डर खत्म, सावन में नहीं भादों में भी अच्छी बारिश

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जयपुर: प्रदेश में अब सूखे की स्थिति बनने रहने का डर लगभग खत्म हो गया है।

सावन ने भले ही धोखा दिया, लेकिन भादो राजस्थान के लिए अच्छा रहा।

इस दौरान अगस्त मेंअच्छी बारिश होनेसे राज्य सरकार और आमजन ने काफी राहत महसूस की तो सूखे का जो डर सावन में सता रहा था।

वह भी अब खत्म हो गया है।

वहीं प्रदेश में बड़े बांधों में भी पानी की अच्छी आवक हो गई है.

आने वाले साल में पेयजल का संकट भी बहुत हद तक दूर हो गया है।

राजस्थान में इस बार मानसून जून में आ तो समय से गया था लेकिन सावन का महीना यहां लगभग सूखा गया।

जुलाई में औसत की आधी बारिश भी नहीं हुई थी।

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अगस्त के शुरुआती हिस्सा भी सूखा ही बीत रहा था और राजस्थान में सूखे की स्थिति बनती नजर आ रही थी।

हालत यह थी 14 अगस्त से शुरू हुए विधानसभा के सत्र से पहले भाजपा सत्र के दौरान सूखे के हालात पर चर्चा की मांग उठा रही थी।

हालांकि सत्र की शुरुआत के दिन ही जयपुर में 10 घंटे में सात इंच यानी करीब 175 मिलीमीटर बारिश हो गई थी।

इसके बाद से ही प्रदेश में लगातार अच्छी बारिश का दौर बना रहा.

 पिछले तीन चार दिन से दक्षिण राजस्थान के उदयपुर,डूंगरपुर बांसवाड़ा में तो बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।

यह है हालात

राजस्थान में औसतन 521 मिलीमीटर बारिश होती है और अगस्त माह तक 446 मिलीमीटर बारिश हो गई है

यानी कुल औसत के मुकाबले 85 प्रतिशत से ज्यादा बारिश हो चुकी है।

अगस्त माह तक 439 मिलीमीटर बारिश होती है।

ऐसे में इस मानसून में पहली बार बारिश का आंकड़ा औसत के मुकाबले प्लस में गया है।

राजस्थान के आठ जिलों में सामान्य से अधिक और 17 में सामान्य बारिश हुई है।

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आठ जिलों में अभी भी सामान्य से कम बारिश हैए लेकिन हालात बहुत ज्यादा खराब नहीं हैं।

राजस्थान में सामन्यत: 15 सितंबर तक बारिश होती है और मौसम विभाग ने तीन सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है।

स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है।

बांधों और तालाबों में आया पानी

राजस्थान राज्य के कुल 742 जलाशयों में से 499 में पानी आ गया है।

दरअसल नदियां ज्यादा नही होने के कारण राजस्थान पेयजल के लिए बड़े बांधों और तालाबों पर निर्भर है।

एक पखवाड़े की बारिश में इनकी स्थिति भी सुधरी है और कुल क्षमता का 65 प्रतिशत पानी बांधों में आ गया है।

बीसलपुर, माही, जवाई बांध जैसे 22 बड़े बांधों में तो 80 प्रतिशत तक पानी है।

इससे पेयजल का संकट बहुत हद तक दूर हो गया है।