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जयपुर बम ब्लास्ट केस का फैसला सुनाने वाले जज को आतंकी खतरा

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जयपुर में बम ब्लास्ट केस(Jaipur bomb blast case)का फैसला सुनाने वाले जज अजय कुमार शर्मा ने डी जी पी को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा को यथावत बनाए रखने की मांग की है. आईबी रिपोर्ट के अनुसार आतंकी कभी भी बदला ले सकते हैं. इसी के चलते सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शर्मा ने डीजीपी को पत्र लिखा है.

उन्होंने पत्र में लिखा है कि मुझे और मेरे परिवार से आतंकी ग्रुप कभी भी बदला ले सकता है. अपने पत्र में रिटायर्ड जज ने कहा कि उनके घर पर शराब की खाली बोतलें फेंकी गई हैं. कई दिनों से मोटरसाइकिल सवार संदिग्ध लोग घर के बाहर चक्कर लगा रहे हैं. उन्होंने घर के बाहर की फोटो भी खींची. ये आतंकी ग्रुप बहुत ही खतरनाक हैं.

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अजयकुमार शर्मा ने अपने पत्र में जज नीलकंठ गंजू के घटनाक्रम का भी जिक्र किया. जज गंजू ने 1984 में आतंकी मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी. उसके बाद 2 अक्टूबर 1989 को आतंकवादियों ने जज गंजू की हत्या कर दी थी(Jaipur bomb blast case).

जयपुर में 13 मई 2008 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट (Jaipur bomb blast case)में करीब 71 लोगों की मौत व 185 लोग घायल हो गए थे. धमाके के करीब 11 साल बाद जज अजय कुमार शर्मा ने चारों आरोपियों मोहम्मद सैफ, सरवर आजमी, सलमान और सैफुर्रहमान को फांसी की सजा सुनाई थी. वहीं संदेह का लाभ देते हुए मुजाहिद्दीन के नाम से धमाकों की जिम्मेदारी लेने वाले आरोपी मोहम्मद शहबाज हुसैन को बरी कर दिया था. 20 दिसम्बर 2019 को इन चारों आरोपियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी.

जयपुर बम ब्लास्ट (Jaipur bomb blast case)की विशेष अदालत में जज नियुक्त होने के साथ ही उन्हे चार गार्ड और दो पीएसओ की सुरक्षा दी गई थी. वह उसके 31 जनवरी 2020 को रिटायर होने के बाद भी बनी हुई है. लेकिन अब उनको मिली हुई सुरक्षा व्यवस्था को हटाने या कम करने की बात चल रही थी.

सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए राजस्थान में लागू होगा तमिलनाडु मॉडल

प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए तमिलनाडु का चर्चित मॉडल लागू होने वाला है.

सीएम अशोक गहलोत के निर्देशों के बाद परिवहन विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है.

राजस्थान में सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गंभीर हैं.

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और इससे हो रही जनहानि की क्षति को कम करने के लिए राज्य सरकार बेहद संवेदनशील है.

इसके लिए सरकार द्वारा निरंतर प्रयास भी किए जा रहे हैं.

प्रदेश में सड़क दुर्घटना और उनसे होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा बजट घोषणा

2020 और 21 के अंतर्गत तमिलनाडु राज्य की तर्ज पर राजस्थान सड़क सुरक्षा रोडमैप तैयार किए जाने की बात कही गई थी.

परिवहन विभाग पिछले कुछ महीनों से इसकी तैयारी में लगा था, जिसे अब तैयार कर लिया गया है.

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वहीं तमिलनाडु राज्य की तर्ज पर राजस्थान सड़क सुरक्षा रोडमैप तैयार किया गया है.

जिसके अंतर्गत प्रदेश के समस्त दोपहिया और चार पहिया वाहन शोरूमों में सड़क सुरक्षा कॉर्नर विकसित किए जाने हैं.

इसको लेकर भी विभाग की ओर से तैयारी की जा रही है.

डीलर प्वाइंट पर सड़क सुरक्षा कॉर्नर विकसित किए जाएंगे.

कॉर्नर में यातायात नियमों को जानकारी वाले पोस्टर बैनर फ्लेक्स स्टैंड प्रदर्शित किए जाएंगे.

सड़क सुरक्षा कार्नर पर डिजिटल सिग्नेचर बॉल और सेल्फी जॉन भी विकसित किया जाएगा.

शोरूम में कार्यरत प्रतिनिधि आगंतुक का सड़क सुरक्षा कॉर्नर पर आगमन सुनिश्चित करेगा.

प्रत्येक जिले से 3 सड़क सुरक्षा कांग्रेस का चुनाव कर परिवहन विभागप्रशस्ति पत्र देगा.

परिवहन आयुक्त रवि जैन ने बताया कि इन सुझावों से सड़क हादसों में काफी कमी देखने को मिलेगी.

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है, कि जिन लोगों को सड़क सुरक्षा से संबंधित नियमों की जानकारी नहीं है.

उनको जानकारी मिल सकेगी और वह कुछ जानकारी के अनुमान से ही सड़क पर वाहन चलाएंगे.

ऐसे में किसी नौसिखिया वाहन चालक को वाहन नहीं मिल सकेगा और उसके चलते सड़क हादसों में काफी कमी आएगी.

रवि जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की विचारधारा यही है, कि प्रदेश में सड़क हादसों में ज्यादा से ज्यादा कमी लाई जा सके,

क्योंकि सड़क हादसों की वजह से काफी लोगों के परिवार को काफी कुछ सहना पड़ता है.