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अब टिड्डियों के बच्चों ने भी डराया, करोड़ों की तादाद में कर रहे हमला

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जयपुर: प्रदेश में टिड्डियों का प्रकोप अभी भी बना हुआ है, जिससे राज्य सरकार के साथ ही किसानों के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही है। इस बीच अब टिड्डी के बच्चे हॉपर्स ने भी डराना शुरू कर दिया है, जिससे सरकार और किसानों की मुश्किले दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

वहीं, मानसून की बारिश के साथ ही शुरू हुई हॉपर्स की समस्या लगातार गहराती जा रही है और आने वाले दिनों के लिए बड़े संकट के संकेत दे रही है। जमीन से रोज करोड़ों की तादाद में हॉपर्स निकल रहे हैं जिन्हें नष्ट करना किसानों और कृषि विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।

टिड्डियों की तरह ही ये हॉपर्स भी फसल के लिए काल के समान होते हैं। कीटविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अर्जुन सिंह बालोदा के मुताबिक अंडों से निकलते ही हॉपर्स फसल को चट करना शुरू कर देते हैं। एक टिड्डी 80 से 125 तक अंडे देती है, यही वजह है कि अब खेतों में करोड़ों की तादाद में हॉपर्स निकल रहे है.

भूरा और काला है रंग

हॉपर्स का रंग भूरा और काला होता है। पंख विकसित नहीं होने के चलते ये खेतों में फुदकते रहते हैं और भोजन की तलाश में एक दिन में एक किलोमीटर दूर तक जा सकते हैं। समय पर कीटनाशक को छिड़काव कर हॉपर्स को नियंत्रित किया जा सकता है। हॉपर्स 5 बार मॉल्टिंग कर वयस्क टिड्डी में तब्दील होते है, उनके अनुसार जब ये वयस्क होते हैं तो इनके पिछले पैर टकराने से ब्रेन में सीरोटीन नामक हॉर्मोन बनता है जिसकी वजह से ये झुंड में तब्दील हो जाते हैं, झुंड में तब्दील होने पर टिड्डियां ज्यादा तबाही मचाती हैं.

बड़े स्तर पर हुई एग लाइन

खतरा इसलिए ज्यादा बड़ा है क्योंकि अब तक पाकिस्तान के रास्ते टिड्डियों के झुंड दूसरे देशों से भारत आ रहे थे लेकिन अब भारत में ही इनका पैदा होना शुरू हो गया है। पिछले दिनों जो टिड्डियां आईं थी उनमें से कई वयस्क थीं जिन्होंने प्रदेश के कई जिलों में बड़े स्तर पर एग लाइन अंडे दिये थे। जोधपुरए जैसलमेर नागौरए चुरूए सीकरए झुंझुनूंए बीकानेर और गंगानगर आदि जिलों में टिड्डियों ने जो अंडे दिए थे उनसे अब हॉपर्स निकल रहे है।