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सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में खानापूर्ति की बैठक

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सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में खानापूर्ति की बैठक

जयपुर: अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की बैठक 12 सितंबर को आहूत कर ली गई है

लेकिन इसमें सरकारी कोटे के सदस्य नहीं होंगे।

राज्य सरकार ने बोर्ड में अभी तक दो विधायकों, दो शिक्षाविदों और दो प्राचार्यों का मनोनयन नहीं किया है।

बोर्ड में अभी तक राज्यपाल के दो प्रतिनिधि ही मनोनीत हुए हैं।

सरकार के 6 सदस्यों के मनोनीत होने का इंतज़ार करने से पहले ही कुलपति ने बैठक बुला ली।

कुल मिलाकर फैसलों में सरकार की भागीदारी नहीं होगी।

उल्लेखनीय है कि यह यूनिवर्सिटी मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है।

खानापूर्ति के लिए यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की इस तरह बैठक बुलाने को सरकारी गलियारों और उच्च शिक्षा क्षेत्र में अच्छी परिपाटी नहीं माना जा रहा।

वैसे भी सरकार के कोटे के अलावा बोर्ड में विश्वविद्यालय कुलपति के कोटे से दो प्रोफेसर व दो डीन भी मनोनीत होते हैं। यह कोटा भी खाली पड़ा है।

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मनोतीत होने वाले कुल 12 प्रतिनिधियों में से सिर्फ दो सदस्यों की मौजदूगी में जल्दबाजी में बैठक बुलाने के औचित्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जब पूरा बोर्ड ही नहीं बना और मनोनीत दो सदस्य हैं तो 12 सितंबर को होने वाले फैसले बोर्ड के फैसले कैसे कहलाएंगे।

 

दरअसल सरकारी अधिकारियों से कोरम पूरा करने की खानापूर्ति की गली निकाल ली गई है।

बैठक के एजेंडे में महत्वपूर्ण एकेडमिक मुद्दे भी हैं लेकिन वहां इन पर चर्चा के लिए कोई शिक्षाविद नहीं है।

राज्य सरकार और कुलपति कोटे को मिलाकर बोर्ड में सभी श्रेणियों में कुल 8 शिक्षविद होते हैं।

राज्यपाल के प्रतिनिधि तो वकील हैं, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं हैं कि अकादमिक निर्णय कौन लोग करेंगे।