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राजस्थान कें मजदूर और जरूरतमंद लोगों को 8 रुपए में मिलेगा भोजन

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  • इंदिरा रसोई योजना की वर्चुअल लॉचिंग

  • 8 रुपए में गरीबों को मिलेगा मुफ्त भोजन

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नें की इंदिरा रसोई योजना की वर्चुअल लॉन्चिंग

आज से गरीब, मजदूर और जरूरतमंद लोगों को दो वक्त का भोजन उपलब्ध कराने की प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी इंदिरा रसोई योजना की शुरुआत होगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कल 20 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर इस योजना को लांच करेंगे.

पिछली भाजपा सरकार के समय प्रदेश में अन्नपूर्णा रसोई योजना शुरू की गई थी. इस योजना के तहत शहरों में मोबाइल वैन के माध्यम से लोगों को खाना खिलाया जाता था. लेकिन परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता और भुगतान संबंधी कई खामियों के चलते प्रदेश की मौजूदा अशोक गहलोत सरकार ने इसे बंद कर दिया था. नए सिरे से योजना लागू करने से पहले आईएएस अधिकारियों के एक दल को अलग-अलग राज्यों में भेजा. इस दल ने चेन्नई की अम्मा रसोई योजना को सबसे उपयुक्त माना. इसी योजना की तर्ज पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर आज 20 सुबह 11:00 बजे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर इंदिरा रसोई योजना की वर्चुअल लॉन्चिंग करेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत योजना के लाभार्थियों से ऑनलाइन संवाद भी करेंगे. इसके लिए जयपुर, जोधपुर, कोटा, सिरोही, बांसवाड़ा, श्रीगंगानगर और राजसमंद जिले की एक-एक रसोई चिन्हित की गई है.

इस योजना की कुछ की कुछ खास बातें हैं

  • योजना के तहत रोजाना 134000 लोगों का पेट भरा जाएगा

  • लोगों को रसोई में सम्मान पूर्वक तरीके से बैठा कर खाना खिलाया जाएगा

  • मात्र ₹8 में व्यक्ति को भोजन उपलब्ध कराया जाएगा

  • प्रदेश के सभी 213 शहरों में इसके लिए कुल 358 स्थाई रसोईयां स्थापित की गई हैं

  • जयपुर में 20, जोधपुर में 16, कोटा में 14 भरतपुर में 5 और शेष नगर निगमों में 10-10 रसोईयां स्थापित की गई हैं

  • हर नगर परिषद में तीन और हर नगर पालिका में एक स्थाई रसोई स्थापित की गई है

  • नगर निगमों में हर रसोई से 300 लोगों को लंच और 300 लोगों को डिनर दिया जाएगा

  • नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों में 150 लोगों को लंच और 150 लोगों को डिनर दिया जाएगा

  • प्रति थाली 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, ढाई सौ ग्राम चपाती और अचार दिया जाएगा

  • क्षेत्र विशेष को देखते हुए प्रचलित भोजन सामग्री भी उपलब्ध कराई जा सकेगी

  • लंच प्रातः 8:30 से लेकर दोपहर 1:00 बजे तक और डिनर शाम 5:00 बजे से लेकर 8:00 बजे तक उपलब्ध कराया जाएगा

  • गुणवत्तापूर्ण भोजन देने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से रसोई का सर्वश्रेष्ठ संचालन करने वाली संस्था होगी पुरस्कृत

  • कलेक्टर हर साल जिले की 2 संस्थाओं को करेंगे पुरस्कृत

इनमें से एक संस्था को राज्य स्तर पर सम्मान के लिए किया जाएगा नॉमिनेट

योजना के तहत प्रदेश में किस शहर में किस रसोई में किसने और कितने लोगों ने खाना खाया, इसकी रियल टाइम निगरानी आम लोग भी कर सकेंगे. इस उद्देश्य के लिए योजना की वेबसाइट भी तैयार की गई है. योजना की लॉन्चिंग के समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस वेबसाइट का भी लोकार्पण करेंगे. योजना की मॉनिटरिंग के लिए एक मोबाइल ऐप भी शुरू किया गया है. इस ऐप की सहायता से निकाय स्तर, जिला स्तर और संभाग स्तर के अधिकारी हर रसोई की ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी कर सकेंगे. आपको बताते हैं कि सूचना तकनीक के उपयोग से इस योजना में किस तरह से पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया है.

  • हर रसोई में सीसीटीवी कैमरा, कंप्यूटर सिस्टम और इंटरनेट की व्यवस्था की गई है

  • इनके माध्यम से लाइव फीड योजना के ऐप पर उपलब्ध रहेगी

  • रसोई पर मौजूद सीसीटीवी कैमरे के लाइव फीड और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मोनिटरिंग की जाएगी

  • जो भी व्यक्ति रसोई में खाना खाने आएगा उसकी फोटो खींची जाएगी।

  • उसकी फोटो और मोबाइल नंबर सिस्टम में अपलोड होगा

  • इंटरनेट कनेक्शन अगर बाधित होता है तो मोबाइल ऐप से भी फोटो और लाभार्थी का मोबाइल नंबर अपलोड किया जा सकेगा

  • सभी लाभार्थियों का प्रतिदिन का डाटा योजना की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा

  • आमजन भी वेबसाइट पर इस संबंध में जानकारी ले सकेंगे

  • लाभार्थियों के हिसाब से ही संबंधित संस्था को सरकार भुगतान करेगी

योजना के तहत कोई भी इच्छुक दानदाता व्यक्ति फर्म या संस्था अपने खर्चे पर जरूरतमंद लोगों को खाना खिला सकेगी. औद्योगिक व व्यापारिक संस्थान कंपनी सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फंड की राशि इस काम पर खर्च कर सकेंगे. दान दी गई राशि का उपयोग लाभार्थी तक पहुंच सके, इसके भी समुचित प्रावधान योजना में किए गए हैं.

  • सहयोग या दान राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष या रजिस्टर्ड जिला स्तरीय इंदिरा रसोई के बैंक खाते में ही जमा होगी.

  • दानदाता चाहे तो योजना की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी राशि जमा करा सकेंगे

  • कोई दानदाता चाहता है की एक शहर में निर्धारित रसोई में ही उसके दिए हुए पैसे से लाभार्थियों को भोजन दिया जाए

  • तो इसके लिए उस दानदाता को उसी संबंधित रसोई में जाकर राशि जमा करानी होगी

  • राशि जमा कराने पर दानदाता को रसीद वेब पोर्टल से ही उपलब्ध कराई जाएगी

  • उस रसोई में भोजन के लिए लाभार्थी को दिए जाने वाले कूपन पर दानदाता और जिसकी स्मृति में दान किया गया है उसका विवरण उपलब्ध होगा

  • दानदाता को भोजन की पूरी लागत प्रति व्यक्ति ₹20 के हिसाब से राशि देनी होगी

प्रदेश भर में 358 रसोइयों के संचालन के लिए करीब एक हजार संस्थाओं ने प्रस्ताव दिए थे. जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति ने निकाय वार इन संस्थाओं का चयन किया है. इनमें अक्षय पात्र और कुहाड़ ट्रस्ट जैसी नामी संस्थाएं भी शामिल है. भोजन की कुल लागत ₹20 में से ₹12 का अनुदान सरकार की ओर से दिया जाएगा.