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लॉकडाउन इफेक्ट: जोधपुरी साफे का व्यवसाय ठप, हजारों लोग हुए बेरोजगार

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कोरोना के संक्रमण ने जोधपुरी साफों के रंग फीके कर दिए हैं. एक हजार से ज्यादा परिवारों पर रोजगार का संकट छाया हुआ हैं. मारवाड़ की आन, बान और शान जोधपुरी साफा (पगड़ी) व्यवसाय पर कोरोना का ग्रहण लग गया है.

मारवाड़ सहित देश- विदेश में जगविख्यात साफा निर्माता सावों के सीजन के बावजूद किसी भी तरह की डिमांड नहीं होने से संकट में है. पिछले ढाई महीने से साफा उद्योग बंद पड़ा है. इस उद्योग से जुड़े करीब हजारो लोग बेरोजगार बैठे हैं. पचरंगी, सतरंगी, गजशाही, बनारसी, सिल्क, कॉटन और मल्टी कलर फ्लावर, बारीक बंधेज सहित 500 से अधिक वैरायटी के साफों से जुड़ी होलसेलर, रिटेल व्यवसायी, कारीगर, साफा बांधने वाले सहित प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष से जुड़े हजारों लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है.

जोधपुरी पगड़ी केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के अन्य भागों समेत विदेश तक एक्सपोर्ट किए जाते हैं. समय के साथ-साथ इसमें सैंकड़ो तरह की डिजायन जुड़ चुकी हैं. इन सभी डिजायनों के साथ पगड़ी ने अपनी धाक कायम रखी है. लेकिन कोरोना संकट काल में यह उद्योग बदहाल है. कारीगर से लेकर पगड़ी व्यापारी तक लॉकडाउन में परेशान हो रहे हैं. शादियों का आधा सीजन बीत चुका है. बाकी के सीजन में भी कोरोना काल में चलते पहले जैसी संभावनाएं खत्म होती जा रही है. कोराबार से जुड़े लोग अब उम्मीद बांधे बैठे हैं कि हालात सुधरे तो शायद शादियों के अगले सीजन तक स्थितियां कुछ बहाल हो जाए.