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हिंसा का वायरल वीडियो को सीमा के साथ जोड़ना दुर्भावनापूर्ण, भारतीय सेना

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अंतरराष्ट्रीय मामला बन चुका भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव को लेकर भारतीय सेना ने पहली बार आधिकारिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया है कि सीमा पर इन दिनों कोई हिंसा नहीं हो रही है. सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत जारी है. भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को फर्जी बताया जिसमें उत्तरी सीमा पर हिंसा का दावा किया जा रहा है.

इस फर्जी वीडियों के वायरल होने के बाद सेना ने आधिकारिक बायन जारी कर कहा, ”हमारे संज्ञान में लाया गया है कि सीमा की घटना बताकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है. इस वीडियो में जो दिखाया जा रहा है वह प्रमाणिक नहीं है. दुर्भावनापूर्ण तरीके से इसे उत्तरी सीमा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. मौजूदा समय में कोई हिंसा नहीं हो रही है.”

गौरतलब हो कि लद्दाख सीमा पर चीन ने अपने नापाक हरकत की शुरुआत अप्रैल के तीसरे हफ़्ते में की थी. लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर “चीन की ओर से सैनिक टुकड़ियों और भारी ट्रकों की संख्या में इज़ाफ़ा दिखा. इसके बाद चीनी सैनिकों को लद्दाख में सीमा का निर्धारण करने वाली झील में भी गश्त करते देखे जाने की बातें सामने आई. मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिनों पहले सेनाध्यक्ष जनरल नरावणे ने सीमा का दौरा किया. मौजूदा तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब किसी देश का नाम लिए बिना चीनी राष्ट्रपति ने ‘सेना को तैयार रहने के निर्देश दे दिया. इसी बीच दिल्ली में तीनों सेनाओं के प्रमुखों की बैठकों के दौर भी शुरू हो गया और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल उस वक्त पकड़ लिया जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले को लेकर भारत-चीन सीमा विवाद में मध्यस्थता की पेशकश कर डाली.