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MDS यूनिवर्सिटी घूस मामला: आरोपियों को 24 सितंबर तक न्यायिक हिरासत

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महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDS University Bribery Case) के वाइस चांसलर आरपी सिंह और उनके दलाल रणजीत सहित महिपाल को आज भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने एसीबी कोर्ट में पेश किया. कोर्ट ने महिपाल जाट और वीसी आरपी सिंह(MDS University Bribery Case) को 24 सितंबर तक जुडिशल कस्टडी में भेज दिया. जबकि दलाल रंजीत को एसीबी ने 5 दिन के रिमांड पर लिया है.

एसीबी के जांच अधिकारी पारसमल पवार ने बताया कि इस मामले में कुल 9 नामजद आरोपियों(MDS University Bribery Case) में से तीन को गिरफ्तार किया जा चुका है. इन तीनों को आज अदालत में पेश किया गया अभी तक जांच में जो निष्कर्ष निकल कर आया है उसके मुताबिक सभी लोग मिलकर घूस का एक सिंडिकेट चला रहे थे. जिसमें एग्जाम पैनल बनवाने कॉलेज की मान्यता दिलाने सहित अन्य मामलों को लेकर बड़ी घूस ली जाती थी और उसे बांट लिया जाता था.

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जांच अधिकारी के मुताबिक आरोपियों(MDS University Bribery Case) के अलग अलग बैंकों में कहते मिले है, जिन्हें सीज कर लिया गया है. रंजीत के चार अलग-अलग बैंकों में खाते मिले जिनमें ₹4 लाख 90000 की राशि थी जिसे फ्रीज किया गया है. वही वाइस चांसलर आरपी सिंह के तीन अन्य बैंक खातों में लगभग 19 लाख 80000 रुपए थे जिन्हें भी सीज किया गया है. जांच में यह भी सामने आया कि हाल ही में भीलवाड़ा से एसके बंसल परिवादी द्वारा भी रिपोर्ट दी गई है, जिसमें एग्जाम पैनल और कॉलेज की मान्यता के संबंध में पैसों की मांग की गई थी.

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जांच के दौरान सभी आरोपियों के मोबाइल सर्विलांस में रखे गए. इस दौरान कई अहम जानकारियां भी निकलकर सामने आई हैं. घूस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ गहन अनुसंधान किया जा रहा है. वहीं आरोपियों के वकील ने बताया उनके मुवक्किल निर्दोष हैं, उन्हें झूठा फंसाया गया है, जबकि उनके खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं.

जयपुर बम ब्लास्ट केस का फैसला सुनाने वाले जज को आतंकी खतरा

जयपुर में बम ब्लास्ट केसका फैसला सुनाने वाले जज अजय कुमार शर्मा ने डी जी पी को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा को यथावत बनाए रखने की मांग की है. आईबी रिपोर्ट के अनुसार आतंकी कभी भी बदला ले सकते हैं. इसी के चलते सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शर्मा ने डीजीपी को पत्र लिखा है.

उन्होंने पत्र में लिखा है कि मुझे और मेरे परिवार से आतंकी ग्रुप कभी भी बदला ले सकता है. अपने पत्र में रिटायर्ड जज ने कहा कि उनके घर पर शराब की खाली बोतलें फेंकी गई हैं. कई दिनों से मोटरसाइकिल सवार संदिग्ध लोग घर के बाहर चक्कर लगा रहे हैं. उन्होंने घर के बाहर की फोटो भी खींची. ये आतंकी ग्रुप बहुत ही खतरनाक हैं.

अजयकुमार शर्मा ने अपने पत्र में जज नीलकंठ गंजू के घटनाक्रम का भी जिक्र किया. जज गंजू ने 1984 में आतंकी मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी. उसके बाद 2 अक्टूबर 1989 को आतंकवादियों ने जज गंजू की हत्या कर दी थी.

जयपुर में 13 मई 2008 को हुए सीरियल बम ब्लास्ट में करीब 71 लोगों की मौत व 185 लोग घायल हो गए थे. धमाके के करीब 11 साल बाद जज अजय कुमार शर्मा ने चारों आरोपियों मोहम्मद सैफ, सरवर आजमी, सलमान और सैफुर्रहमान को फांसी की सजा सुनाई थी. वहीं संदेह का लाभ देते हुए मुजाहिद्दीन के नाम से धमाकों की जिम्मेदारी लेने वाले आरोपी मोहम्मद शहबाज हुसैन को बरी कर दिया था. 20 दिसम्बर 2019 को इन चारों आरोपियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई थी.

जयपुर बम ब्लास्ट की विशेष अदालत में जज नियुक्त होने के साथ ही उन्हे चार गार्ड और दो पीएसओ की सुरक्षा दी गई थी. वह उसके 31 जनवरी 2020 को रिटायर होने के बाद भी बनी हुई है. लेकिन अब उनको मिली हुई सुरक्षा व्यवस्था को हटाने या कम करने की बात चल रही थी.