Rajasthan Exclusive > राजस्थान > संसद का मानसून सत्र14 सितम्बर से शुरू होगा

संसद का मानसून सत्र14 सितम्बर से शुरू होगा

0
160

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद के मानसून सत्र (Monsoon session of parliament)को लेकर गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस की प्रेस को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि संसद का आगामी मानसूत्र सत्र(Monsoon session of parliament) 14 सितम्बर से 1 अक्टूबर तक संचालित होगा. इस दौरान सत्र की कुल 18 बैठकें होंगी. उन्होंने कहा कि सत्रों(Monsoon session of parliament) के सुरक्षित संचालन के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं. लोकसभा की कार्यवाही पहले दिन सुबह और उसके बाद सत्र(Monsoon session of parliament)के अंत तक दोपहर में होगी. सांसदों समेत सभी की स्वास्थ्य सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई है.

इस दौरान कोरोना के सभी गाइडलाइन का सख्ती से सबको पालन करना होगा. सोशल डिस्टेंसिंग, पारदर्शी, एलईडी स्क्रीन के इंतजाम, टचलैस सैनिटाइजर, फुटमैट, टैम्परेचर स्कैनर, थर्मल स्क्रीनिंग कैमरे लगेंगे. सांसदों समेत सभी का कोविड टेस्ट होगा. प्रश्नकाल नहीं होगा ,अतारांकित-लिखित प्रश्नों के उत्तर सभा पटल पर रखे जाएंगे.

यह भी पढे: जयपुर संभाग का फीडबैक शुरू, पायलट कैम्प पर टिकी है सबकी निगाहें

शून्य काल आधे घंटे का रहेगा, गैर सरकारी सदस्यों का कार्य नहीं लिया जाएगा. सांसदों की उपस्थिति एप के माध्यम से होगी. ओम बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी सांसदों के सहयोग और स्वस्थ एवं व्यापक चर्चा के माध्यम से मानसून सत्र(Monsoon session of parliament) के दौरान जनहित एवं राष्ट्रहित के सर्वोच्च लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता प्राप्त होगी.

जयपुर संभाग का फीडबैक शुरू, पायलट कैम्प पर टिकी है सबकी निगाहें

फीडबैक कार्यक्रम का आज गुरुवार को दूसरा दिन है। माकन आज जयपुर संभाग के जिलों के कांग्रेस नेताओं से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जिलेवार फीडबैक ले रहे हैं। सुबह 10.15 बजे से इसकी शुरूआत से जयपुर शहर के नेताओं की बैठक से हुई। इसके बाद 11 बजे जयपुर देहात की बैठक हुई। 12 बजे अलवर और 12.45 बजे से झुंझुनूं के नेताओं से चर्चा होगी। दोपहर बाद 3 बजे सीकर और 4 बजे दौसा जिले के कांग्रेस नेताओं से संवाद होगा।

जयपुर शहर से करीब 80 नेता आए

फीडबैक के लिए सबसे ज्यादा नेता जयपुर शहर और जयुपर देहात से ही आए क्योंकि जयपुर जिले में ही सबसे ज्यादा पार्टी पदाधिकारी रहते हैं। जयपुर शहर से करीब 80 और जयपुर देहात से 70 नेता फीडबैक कार्यक्रम में बुलाए गए। बाकी हर जिले से 50-50 के करीब नेताओं को बुलाया गया है।

यह भी पढे: नेताओं ने अफसरशाही पर उठाए सवाल, पुराने कांग्रेसियों का दर्द भी छलका

इनमें हर जिले से विधायक, विधायक उम्मीदवार, सांसद उम्मीदवार, एआईसीसी पदाधिकारी और सदस्य, पूर्व पीसीसी पदाधिकारी, निवर्तमान जिलाध्यक्ष, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, पीसीसी सदस्य और सहवृत सदस्य समेत प्रकोष्ठों के निवर्तमान प्रदेशाध्यक्षों को बुलाया गया है।

पायलट कैम्प पर निगाहें

जयपुर संभाग के फीडबैक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सचिन पायलट कैम्प के नेता भी आए। पायलट के पुराने निर्वाचन क्षेत्र दौसा से भी बड़ी संख्या में नेता फीडबैक देने आएंगे। पायलट कैम्प के नेताओं के रुख पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। अजमेर संभग के फीडबैक कार्यक्रम के दौरान जिस तरह पायलट कैम्प के समर्थकों ने नारेबाजी की उसके बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हैं। फीडबैक कार्यक्रम में सत्ता खेमे और पायलट कैम्प के नेताओं के रुख पर कांग्रेस की आगे की सियासत निर्भर करेगी।

पायलट कार्यकर्ताओं में पकड़ करेंगे मजबूत

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थकों को एकजुट करने की कवायद में जुटे हैं।

उन्होंने अपने समर्थकों से टेलिफोन पर संपर्क साधना शुरू कर दिया हैं।

इसके साथ ही पायलट के खास विधायक लगातार कार्यकर्ताओं से संपर्क साध रहे हैं।

माना जा रहा है, कि पायलट प्रदेश की यात्रा करेंगेऔर प्रदेश के सभी 33 जिलों का दौर करके अपने समर्थकों से बात करेंगे तथा अपनी पकड़ को और अधिक मजूत करने का कार्य करेंगे।

इसकी शुरूआत पूर्वी राजस्थान से होगी।

यह भी पढे: राजस्थान की असंवेदनशील कांग्रेस सरकार के चलते किसान सड़कों पर: शेखावत

पूर्वी राजस्थान के आधा दर्जन जिलों में पायलट की पकड़ मजबूत है।

इन जिलों में गुर्जर और मीणा मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं।

इनमें टोंक, दौसा,करौली,सवाईमाधोपुर,भरतपुर व अलवर जिले शामिल है।

पायलट फिलहाल सरकार में है और न ही संगठन में हैं।

अभी वे कांग्रेस के नेता और विधायक जरुर हैं।

ऐसे में पायलट के इन दौरों के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।

क्या पायलट बगावत और घर वापसी के बाद जनता के बीच अपने समर्थन का पारा नापने के लिए दौरे करेंगे या दौरों से जनसमस्याएं सुनकर गहलोत और अपनी ही पार्टी की सरकार पर जनता के काम का दबाब बनाएंगे।