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रबी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी, गेहूं पर 50 रु. की बढ़ोतरी

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संसद के मॉनसून सत्र में राज्यसभा में आज विपक्षी सांसदों के हंगामे का मुद्दा गर्माया रहा. वहीं कृषि बिल के विरोध के बीच रबी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP News) की बढ़ोतरी को मंजूरी मिल गई है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में नई कीमत बताईं. गेहूं के मूल्य में 50 रुपये की बढ़ोतरी जबकि चना पर 225 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया है.

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ने रबी फसल पर एमएसपी (MSP News) को मंजूरी दे दी. गेहूं का एमएसपी (MSP News) 50 रुपये प्रति क्विंटन बढ़ाया गया. एमएसपी बढ़ने के बाद अब गेहूं 1975 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है.

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इसके अलावे चना के समर्थन मूल्य (MSP News) में 225 रुपए प्रति क्विंटल, जौ के समर्थन मूल्य (MSP) में 75 रुपए प्रति क्विंटल, मसूर के समर्थन मूल्य (MSP News) में 300 रुपए प्रति क्विंटल और सरसों एवं रेपसीड के समर्थन मूल्य (MSP News) में 225 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है.

पीएम ने दिलाया था भरोसा

आज पीएम मोदी ने कहा था, “मैं देश के प्रत्येक किसान को इस बात का भरोसा देता हूं कि MSP की व्यवस्था जैसे पहले चली आ रही थी, वैसे ही चलती रहेगी. इसी तरह हर सीजन में सरकारी खरीद के लिए जिस तरह अभियान चलाया जाता है, वो भी पहले की तरह चलते रहेंगे.”

साथ ही उन्होंने कहा था, “किसानों को मिली इस आजादी के लाभ दिखाई देने शुरू हो गए हैं. खरीदारों ने सीधे कोल्ड स्टोरेज से किसानों से आलू खरीद लिए हैं. यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दालें बहुत होती हैं. दाल मिलों ने वहां भी किसानों से खरीद कर सीधे ही भुगतान किया है.’’

8 सांसद हुए थे निलंबित

इससे पहले सभापति ने हंगामा करने वाले सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की. हंगामा करने वाले विपक्षी दलों के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है. निलंबित होने वाले सांसदों में डेरेक ओ ब्रायन, संजय सिंह, रिपुन बोरा, नजीर हुसैन, केके रागेश, ए करीम, राजीव साटव, डोला सेन हैं. कल की घटना पर सभापति ने कहा कि ये राज्यसभा के लिए सबसे खराब दिन था. कुछ सांसदों ने पेपर को फेंका. माइक को तोड़ दिया. रूल बुक को फेंका गया. इस घटना से मैं बेहद दुखी हूं. उपसभापति को धमकी दी गई. उनपर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई.

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कृषि मंत्री ने कहा-‘मैं किसानों से कहना चाहता हूं कि जब हमारे कांग्रेस के मित्र कह रहे थे कि इन बिलों के बाद एमएसपी समाप्त हो जाएगी, मैंने तब भी कहा था कि एमएसपी जारी रहेगी, आज हमने एमएसपी बढ़ाकर यह प्रमाणित किया है कि यह जारी रहेगी, एपीएमसी के बाहर किसान अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए किसी को भी बेच सकते हैं।’

उल्लेखनीय है कि सरकार हर फसल सीजन से पहले कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज की सिफारिश पर एमएसपी तय करती है। यदि किसी फसल की बंपर पैदावार हुई है, तो उसकी बाजार में कीमतें कम होती हैं, तब एमएसपी किसानों के लिए फिक्स एश्योर्ड प्राइज का काम करती है।