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अदालती फैसले के बाद भी ज्यादा कुछ नहीं बदलने वाला

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जयपुर: राजस्थान में स्पीकर की तरफ से बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की याचिका पर सचिन पायलट और उनके 18 समर्थक विधायकों को नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर राजस्थान हाई कोर्ट का मंगलवार को फैसला आना है लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि यह फैसला अगर बागियों के हक में भी गया तब भी कुछ खास नहीं बदलने वाला। गहलोत खेमा इसके लिए भी पहले से पूरी तैयारी कर ली है।

सोनिया-गहलोत का डबल गेम

कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और सीएम अशोक गहलोत ने पायलट कैंप पर ऐसा शिकंजा कसा है कि उनका निकलना आसान नहीं है। राजस्थान में मध्य प्रदेश की कहानी न दुहराई जाए, इसके लिए कांग्रेस आलाकमान ने समय रहते मोर्चा संभाल लिया। पायलट को डेप्युटी सीएम और राजस्थान कांग्रेस के चीफ पद से हटाने के साथ-साथ सोनिया गांधी ने सूबे में पार्टी के पूरे संगठन को ही मथ दिया। बतौर प्रदेश अध्यक्ष पायलट ने अपने 7 साल के कार्यकाल में संगठन में अपने जितने भी लोगों को जगह दी थी, एक झटके में उन सभी को उनके पदों से हटा दिया गया। यह सोनिया-गहलोत का पहला सीधा वार था। दूसरे वार का ब्लू प्रिंट भी पूरी तरह तैयार है। अगर हाई कोर्ट का

फैसला पायलट खेमे के पक्ष में गया तो सदन में बहुमत परीक्षण को लेकर पार्टी फिर से विप जारी करेगी। तब पायलट और उनके समर्थक विधायकों को सदन में विप का पालन करना ही होगा नहीं तो उनको अयोग्य ठहराये जाने की प्रक्रिया और आसान हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक सीएम गहलोत जब शनिवार को गवर्नर कलराज मिश्र से मिले तो उन्हें किसी भी वक्त सदन में बहुमत साबित करने की अपनी इच्छा से अवगत कराया। सीएम ने गवर्नर को 2 अन्य विधायकों के सरकार को मिले समर्थन की जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक गहलोत ने गवर्नर को बताया कि वह विधानसभा का सत्र बुलाएंगे और बहुमत परीक्षण से गुजरेंगे। हालांकि, सत्र बुलाने के फैसले में कानूनी लड़ाई की वजह से देरी हो रही है।