Rajasthan Exclusive > राजनीती > कांग्रेस की तरफ मुड़ा पायलट का जहाज, जादूगर गहलोत की रणनीति हुई कामयाब

कांग्रेस की तरफ मुड़ा पायलट का जहाज, जादूगर गहलोत की रणनीति हुई कामयाब

0
231

जयपुर: राजस्थान में 32 दिनों से चल रहा सियासी घमासान आखिरकार सोमवार देर रात खत्म हो गया।

अब तक बागी रुख अख्तियार किए हुए सचिन पायलट ने सोमवार को नरमी दिखाई।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात के बाद उनकी सुलह हो गई।

इसके बाद पायलट ने साफ कर दिया कि उनकी कांग्रेस से कोई बैर नहीं है।

उन्हें पद की लालसा भी नहीं है। अगर पार्टी पद दे सकती है, तो ले भी सकती है।

इन सबके बीच अशोक गहलोत की राजनीतिक सूझबूझ की काफी चर्चा रही और आखिरी राजनीति के जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत ने सचिन पायलट का जहाज वापस कांग्रेस की तरफ मोड़ दिया।

सोमवार को कांग्रेस का टॉप नेतृत्व ही पायलट को वापस लाने में एक्टिव दिखा।

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेट्री केसी वेनुगोपाल ने बताया कि सचिन पायलट की इस मुलाकात के बाद सोनिया गांधी ने फैसला किया है कि पायलट और असंतुष्ट विधायकों की ओर से उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए पार्टी तीन सदस्यीय एक कमेटी का गठन करेगी।

यह भी पढे: सीकर में कोरोना विस्फोट, 1 दिन में मिले अब तक के सर्वाधिक 143 संक्रमित मरीज

इसमें सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी और मंथन करने के बाद उचित रास्ता निकाला जाएगा।

सीएम गहलोत ने हर चाल चली

कांग्रेस ने सचिन पायलट को बागी करार देकर राजस्थान के डिप्टी सीएम के पद से हटा दिया था।

उन्हें राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष पद से भी बेदखल कर दिया गया था।

डिप्टी सीएम और उनके समर्थक विधायकों के बागी होने के बाद भी गहलोत ने कभी ऐसा नहीं दिखाया कि उनकी सरकार को कोई खतरा है।

वो हमेशा पूर्ण बहुमत का दावा करते रहे.

गहलोत ने हर बार विधानसभा की सभी 200 सदस्यों के समर्थन की बात कही।

गहलोत का ये कॉन्फिडेंस विरोधी खेमे का कॉन्फिडेंस गिराता रहा।

अशोक गहलोत जहां अपनी सरकार को खतरे से बाहर दिखा रहे थे, वहीं दूसरी ओर बागी खेमे के हर एक्टिविटी पर कड़ी नजर भी बनाए हुए थे।

यहां तक कि जयपुर का फेयरमोटं होटल हो या जैसलमेर का सूर्यगढ़ पैलेस, गहलोत ने अपने खेमे के विधायकों को कहीं भी ढील नहीं दी।

वह इसके साथ-साथ पायलट खेमे में गए एक-एक विधायकों से पर्सनली बात करके उन्हें मनाने की कोशिश करते रहें।

यह भी पढे: पायलट के यू टर्न से भाजपा खेमे में निराशा

अशोक गहलोत ने जिद पर अड़े बागी विधायकों को समझाने के लिए एसीबी, एसओजी का डर तो दिखाया ही, कोर्ट में पैरवी भी की गई।

यहां तक कि ऑडियो टेप जारी किये गए तो कभी वॉयस सैंपल के जरिए बागी विधायकों पर दबाव बनाया गया।

इस बीच बीएसपी विधायकों के मामले में कोर्ट के फैसले से पहले विधायक दल की बैठक में भी पूर्ण बहुमत का दावा किया गया।

गहलोत ने कुछ बीजेपी के विधायकों के भी संपर्क में होने का दावा किया।

गहलोत ने ये जताने की कोशिश की थी कि अगर उस वक्त फ्लोर टेस्ट होता, तो सरकार इसे पास कर लेगी।

गहलोत इस दौरान पायलट को भी समझाने में लगे रहे।

कुछ जगहों पर सख्ती भी दिखाई।

यह भी पढे: CM गहलोत से मुलाकात के बाद विधायक भंवरलाल बोले, मेरा पार्टी से कोई गिला-शिकवा नहीं

कई जगहों पर ये भी दिखाया कि उनके पार्टी से चले जाने से सरकार नहीं गिरेगी।

इससे आखिकार बागी विधायकों का मनोबल कम हो गया। वो दोबारा सोचने पर मजबूर हो गए।

इन तमाम दांव-पेच के आगे सचिन पायलट और उनके खेमे के 18 विधायक की सारी रणनीति फेल हो गई।

मजबूरन पायलट को गांधी परिवार से मिलने का समय मांगना पड़ा।