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तालाबंदी के दौरान कितने प्रवासी मजदूरों की मौत?, सरकार ने संसद में कहा-पता नहीं

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  • कोरोना पर काबू पाने के लिए अचानक लागू की गई थी राष्ट्रव्यापी तालाबंदी
  • तालाबंदी से सबसे ज्यादा परेशान हुआ था प्रवासी मजदूरों का वर्ग
  • सदन में विपक्ष ने सरकार से पूछ सवाल कितने मजदूरों की हुई थी मौत
  • सरकार ने संसद में दिया जवाब इसका कोई डेटा उपलब्ध नहीं

कोरोना की वजह से लागू की गई तालाबंदी की वजह से सबसे ज्यादा अगर कोई प्रभावित हुआ था तो वह था देश का प्रवासी मजदूरों का वर्ग.

अचानक लागू की गई तालाबंदी की वजह से पहले इन लोगों को खाने पीने के लिए परेशान होना पड़ा उसके बाद घर निकाले जाने की दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा.

इन सभी परेशानियों से परेशान होकर प्रवासी मजदूर शहरों से गांव की तरफ रवाना हो गए. जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों को मौत से हाथ धोना पड़ा.

तालाबंदी के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों की हुई थी मौत Parliament Proceedings News:

कुछ लोग चिलचिलाती धूप में अपने परिवार के साथ अपने गांव जाने को रवाना हुए कुछ लोग मुश्किलों का सामना करते हुए घर पहुंचने में कामयाब हुए वहीं कुछ लोगों की बीच रास्ते में भूख और प्यास की वजह से मौत हो गई.

उन दिनों हर दिन किसी ना किसी राज्य से प्रवासी मजदूरों की मौत की खबर सामने आ रही थी.

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कभी रेल की पटरी पर तो कभी सड़क हादसे में लेकिन अफसोस की सरकार (Parliament proceedings news) के अचानक लागू किए अपने फैसले की वजह से कितने लोगों की मौत हुई इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है.

तालाबंदी के दौरान कितने प्रवासी मजदूरों की मौत? मोदी सरकार के पास नहीं है कोई डेटा Parliament Proceedings News:

संसद सत्र (Parliament proceedings news) के मानसून का आगाज हो चुका है सदन की कार्रवायी के पहले दिन विपक्ष ने मोदी सरकार से सवाल किया कि तालाबंदी के दौरान कितने प्रवासी मजदूरों (Parliament proceedings news) की मौत हुई.

इसके जवाब में केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा कि हमारे पास इसका को डाटा मौजूद (Parliament proceedings news) नहीं है. लोकसभा में सवाल किया गया कि सरकार को यह मालूम है कि प्रवासी मजदूरों को घर लौटते हुए मौत हुई थी.

क्या राज्यवार मृतकों की संख्या का लिस्ट सरकार के पास मौजूद है? क्या पीड़ितों को सरकार ने कोई मुआवजा या आर्थिक सहायता दी?

इस सवाल के जवाब में केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा कि इसका कोई भी डेटा सरकार के पास उपलब्ध नहीं है.

इतना ही नहीं मंत्रालय (Parliament proceedings news) की ओर से जानकारी दी गई कि सरकार के पास डेटा मौजूद नहीं है इसलिए पीड़ितों को या फिर उनके परिवार को मुआवजा देने का सवाल ही नहीं उठता.