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जयपुर में 360 मीटर में उत्तरी रिंग रोड बनाने की तैयारी

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  • जमीन अवाप्ति से पहले जेडीए आमजन से लेकर सुझाव एवं आपत्तियां

  • दक्षिण रिंग रोड की तर्ज पर सडक के दोनों तरफ विकसित किए जाएंगे डवलमेंट कॉरिडोर

जयपुर: जयपुर में आगरा रोड से दिल्ली बाइपास, सीकर बाइपास होते हुए अजमेर रोड तक प्रस्तावित उत्तरी रिंग रोड परियोजना में नया मोड आया है।

इस रोड के लिए पहले 90 मीटर चौड़ाई में जमीन अवाप्त की जानी थी, लेकिन अब जयपुर जेडीए प्रशासन यहां 90 की बजाय 360 मीटर चौड़ाई में जमीन अवाप्ति की योजना बना रहा है।

इस संदर्भ में जेडीए आयुक्त की अध्यक्षता में उत्तरी रिंग रोड के अलाईनमेंट के निर्धारण के लिए गठित कमेटी की बैठक भी हुई।

बैठक में मास्टर विकास योजना-2025 में प्रस्तावित उत्तरी रिंग रोड (आगरा रोड से दिल्ली रोड और दिल्ली रोड से अजमेर रोड) के अलाईनमेंट के निर्धारण पर भी चर्चा की गई।

क्योंकि मास्टर प्लान में जहां रिंग रोड का अलाईनमेंट निर्धारित है उसके विपरित नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने दूसरा अलाईनमेंट जेडीए को प्रस्तावित किया है।

इस प्रस्ताव को जल्द ही यूडीएच मंत्री के समक्ष भिजवाया जाएगा।

1800 करोड़ का मुआवजा देना चुनौती

एनएचएआई ने उत्तरी रिंग रोड के निर्माण के लिए 90 मीटर चौड़ाई में जमीन अवाप्ति का प्रस्ताव तैयार किया है।

इस 90 मीटर चौड़ाई में ही रिंग रोड का ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनेगा।

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जमीन अवाप्ति पर लगभग 1800 करोड़ रुपए का नकद मुआवजा प्रभावित किसानों अथवा खातेदारों को देना है, जिनकी जमीन रोड में जाएगी।

ये मुआवजा एनएचएआई ने जेडीए से मांगा है।

सूत्रों की माने तो इतनी बड़ी राशि देना जेडीए के लिए बहुत मुश्कील है।

अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए जेडीए ने 90 की बजाए 360 मीटर चौड़ाई में जमीन अवाप्ति की योजना बनाई है

जैसे दक्षिण रिंग रोड (आगरा रोड से अजमेर रोड तक निर्माणाधीन) की है.

जिसमें 90 मीटर में ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और रोड के दोनों तरफ शेष जमीन 135-135 मीटर में डवलपमेंट कॉरिडोर विकसित किया जा सके।

ताकि नकद मुआवजे के बजाए खातेदारों को विकसित जमीन का विकल्प दिया जा सके।

आमजन से लेंगे सुझाव व आपत्तियां

चूंकि परियोजना के लिए अब ज्यादा जमीन अवाप्त की जानी है ऐसे में लोगों से आपत्ति एवं सुझाव मांगे जाएंगे।

इसके लिए जेडीए अधिनियम 1982 की धारा-25 (3) के अंतर्गत जनसाधारण से आपत्ति एवं सुझाव मांगेगा।

इन आपत्ति एवं सुझावों का निस्तारण करने के बाद परियोजना को अनुमोदित किया जाएगा।