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निजी हॉस्पिटल बंद कर सकते हैं आयुष्मान भारत योजना से इलाज

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  • प्रदेष के निजी हॉस्पिटल्स के संगठन उपचार ने प्रदेषस्तरीय बैठक में लिया निर्णय

  • भामाषाह एवं आयुष्मान भारत में अटकी हुई राषि के चलते लिय निर्णय

  • जिला स्तर पर सीएमएचओ एवं जिला मुख्यालयों पर प्रदर्षन की तैयारी

जयपुर: बडी संख्या में प्रदेष के निजी हॉस्पिटल्स आयुष्मान भारत योजना के तहत निषुल्क इलाज बंद कर सकते है।

हॉस्पिटल्स के एसोसिएषन उपचार ने प्रदेषस्तरीय बैठक के दौरान यह निर्णय लिया है.

बतौर एसोसिएषन यदि भामाषाह का बकाया एवं आयुष्मान योजना का भुगतान तय समय में नहीं हुआ.

तो हॉस्पिटल्स इन योजनाओं के तहत इलाज करने में सक्षम नहीं हो सकेंगे।

अपनी मांग को लेकर यूनियन जल्द ही प्रदेषस्तर पर जिला मुख्यालयों एवं सीएमएचओ पर प्रदर्षन करेगी।

अपनी मांगो के बारे में पत्रकारो को जानकारी देते हुए स्टेट वर्किंग कमेटी के डॉ सुनील कुमार गर्सा ने बताया कि इन योजनाओं के दौरान बीमा कंपनी का प्रीमीयम चार वर्षों में चार गुना तक बढ गया,

जबकि इलाज का पैकेज अभी तक वही है ।

उन्होंने भुगतान के साथ ही अपनी अन्य मांगो को लेकर भी सरकार से जल्द ही बात किए जाने की जानकारी दी।

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इस मौके पर उनके साथ उपचार की स्टेट वर्किंग कमेटी के जयपुर के प्रभारी डॉ सुनील कुमार गर्सा के देखरेख में तथा डॉ रामदेव चैधरी, डॉ राजपाल लाम्बा, डॉ विवेक साबू, उपचार जयपुर ब्रांच के अध्यक्ष डॉ विनोद गुप्ता, सचिव डॉ यू.एस. बेनीवाल, उपाध्यक्ष डॉ किशन सिंह, वित्त सचिव डॉ असीम गुप्ता समेत अन्य पदाधिकारी की उपस्थिति में आयोजित की गई ।

70 प्रतिषत मरीजो को परेषानी

प्रदेशभर में करीब पांच हजार से अधिक निजी अस्पताल एवं क्लिनिक में प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत मरीज चिकित्सा सुविधा प्राप्त करते हैं।

ऐसे में इन योजनाओं के तहत इलाज नहीं होने की स्थिति में प्रदेश में बड़े पैमाने पर आमजन को चिकित्सा सुविधाओं उपलब्ध होने में परेशानी आ सकती है।

क्या है मामला

सरकारी भामाशाह योजना के तहत पिछले काफी अरसे से सम्बन्धित बीमा कंपनी ( नेशनल इंडिया इन्ष्योरेंस ), द्वारा भुगतान नहीं किया जा रहा है ।

गौरतलब है कि अब तक निजी अस्पतालों के करोड़ो रुपये का भुगतान उक्त बीमा कंपनी द्वारा बिना उचित कारणों के रोक देने के कारण, इन निजी अस्पतालों पर आर्थिक संकट गहराने लगा है।

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12 दिसंबर 2019 से पहले जो बीमा कंपनी भामाशाह योजना में काम कर रही थी उसने स्वीकृत क्लेम्स का 65 करोड़ का पेमेंट अटका रखा है, 90 हजार के लगभग क्लेम्स पेंडिंग में रखे हुए है।

इस पर सरकार द्वारा भावी आयुष्मान भारत योजना में फिर से उसी बीमा कंपनी की सेवा लेकर तथा केंद्र द्वारा इलाज की तय दरों से कम दरें सम्मलित करके, पुनः निजी अस्पतालों से इस योजना में अनुबंधित होने के प्रस्ताव मांगे हैं, जिसने कोड में खाज का काम किया है।

साथ ही सरकार द्वारा कोविद मरीजों के भी मुफ्त इलाज हेतु निजी अस्पतालों पर दबाव बना जा रहा है, जिससे कई निजी अस्पताल संकट की स्थिति में आ सकते हैं।

ये है मांगे

  • भामाशाह बीमा योजना में निजी अस्पतालों के बकाया धनराशि का भुगतान किया जाए ।
  • अस्वीकृत क्लेम्स को निश्चित समय में सुनवाई करके उनका निस्तारण किया जाए ।
  • बीमा कंपनी जिसने एमओयू का उलंघन किया है , जो की सही समय पर अस्पतालों को पैसे ना देने की दोषी है , उसे शामिल नहीं किया जाए ।
  • स्टेट लेवल एवं डिस्ट्रिक्ट लेवल की एम्पेनलमेंट तथा ग्रीवेंस कमिटी में प्राइवेट हॉस्पिटल्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल किए जाए ।