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प्रदेश में बढ़ रही निजी स्कूलों की मनमानी, बच्चों के साथ हो रहा भेदभाव

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  • ओनलाइन पढ़ाई में ओफलाइन की तरह छात्रों को कर रहे प्रताड़ित
  • स्कूल संचालक फीस वसूलने के लिए अपना रहे नए-नए तरीके
  • सरकार ने लगा रखी है स्कूल खुलने तक रोक

जयपुर: प्रदेशभर के निजी स्कूलों की मनमानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिसको रोकने में राज्य सरकार और शिक्षा विभाग नाकाम साबित हो रहे है।

कोरोना काल में फीस पर रोक के बावजूद प्राइवेट स्कूल फीस वसूलने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

ओनलाइन पढ़ाई में फीस नहीं देने वाले बच्चों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

इस दौरान कक्षा में बच्चों को कनेक्ट नहीं करने सहित अन्य तरीके अपनाए जाते हैं।

दरअसल प्रदेश के साथ ही देशभर में मार्च महीने से कोचिंग संस्थान, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय सहित अन्य शिक्षण संस्थान बंद हैं।

इस तरह कर रहे परेशान

प्रदेश के कई निजी स्कूल ओनलाइन क्लासेज में बच्चों को जोड़ते हैं तो उसमें जिन बच्चों ने फीस नहीं दी होती है, उनको क्लास में नहीं लिया जाता है।

क्लासेज जब शुरू होती है तो फीस नहीं देने वाला स्टूडेंट अपनी स्कूल की क्लास में जुड़ने के लिए लिंक करता है तो पढ़ाई करवाने वाला शिक्षक या स्कूल प्रशासन उसको कक्षा में जोड़ते ही नहीं है।

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इस मामले की बच्चों को अभी तक जानकारी ही नहीं है।

वह सोचते है कि कनेक्टिविटी या नेट की परेशानी है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।

इस तरह से बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

बच्चे मानसिक रूप से भी प्रताड़ित हो रहे है।

घालमेल को दे रहे अंजाम

इसमें स्कूल प्रशासन और शिक्षक दोनों की मिलकर घालमेल करते हैं।

बच्चों के साथ अभिभावक भी परेशान हो रहे है।

जब वे इस मामले में स्कूल प्रशासन से बात करते है तो वह उनको कनेक्टिविटी सहित अन्य समस्याओं को गिनाते है और अंत में फीस जमा कराने की बात कहते है।

शिकायतें आ रही

ओनलाइन पढ़ाई में भी बच्चों को परेशान किया जा रहा है, जिससे की बच्चों के अभिभावक फीस जमा करवा दें।

वहीं, इस मामले में किसी भी अभिभावक अपनी शिकायत शिक्षा संकुल स्थित जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय और नवज्योति कार्यालय में कर सकते हैं।

यह है शिक्षा के नियम

राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के शिक्षा नियमों के अनुसार स्कूल में बच्चों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकती है। और ना ही किसी बच्चे को स्कूल प्रशासन पढ़ाई से वंचित कर सकता है।

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यदि ऐसा किया जाता है तो स्कूल प्रशासन और शिक्षक दोनों पर कार्रवाई की जा सकती है।

शिक्षा नियमों के अनुसार ऐसी घटनाओं को राइट टू एजुकेशन डिप्राइव करने की है।

अभी लगा रखी है फीस पर रोक

राज्य सरकार ने कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए निजी स्कूलों की फीस पर पहले तीन माह यानी अप्रैल, मई और जून की फीस पर रोक लगाई थी।

इसके बाद जुलाई के दूसरे सप्ताह में सरकार ने फीस पर फिर से आगामी आदेशों तक रोक लगा दी है।

इनका कहना है…..

प्रदेशभर के सरकारी और निजी स्कूल जब खुलेंगे, पढ़ाई होगी तभी अभिभावकों को फीस देनी होगी।

अभी जो विवाद हो रहा है, वह यह है कि कुछ स्कूलों के पास अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और ओनलाइन पढ़ाई का बेहतर सेटअप है।

ये स्कूल केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पैटर्न पर चल रहे हैं।

इन स्कूलों को बच्चों की कैपेसिटी बिल्डप करने के लिए ओनलाइन क्लासेज लेने को कहा है।

हाईकोर्ट ने भी इस पर फैसला दिया है।

यह स्कूल अपने बच्चों को कोरोना काल में पढ़ाई से वंचित नहीं रखना चाहते है।

इसलिए वह बच्चों को ओनलाइन शिक्षा दे रहे है।

कहीं पर भी शिक्षा देने के लिए किसी ने मना नहीं किया है।

यदि कोई स्कूल ओनलाइन पढ़ाई का चार्ज (फीस) अभिभावकों से लेता है तो उस स्कूल को अभिभावकों को बताना पड़ेगा की, हम किस तरह की पढ़ाई की सुविधा के लिए फीस ले रहे हैं।

पाठ्यक्रम की फीस अभी नहीं ले सकते है। वहीं, फीस के नाम पर किसी भी बच्चे का नामांकन स्कूल से नहीं काट सकते है।

यदि ऐसा किया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गोविन्द सिंह डोटासरा, शिक्षा राज्यमंत्री

इस संबंध में विभाग के पास अभी तक कोई भी शिकायत नहीं आई है।

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शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल सरकार और शिक्षा विभाग ने फीस पर रोक लगा रखी है।

सौरभ स्वामी, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा विभाग

बच्चों के साथ ओनलाइन क्लासेज के दौरान भेदभाव बच्चों में हीन भावना पैदा कर सकता है।

ऐसे में बच्चों के मन में अपने सहपाठियों से पिछड़ने का डर रहता है और बच्चे डिप्रेशन का भी शिकार हो सकते है।