Rajasthan Exclusive > राजस्थान एक्सक्लूसिव > राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति की तानाशाही, गैर कानूनी रूप से महिलाकर्मी को नौकरी से निकाला

राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति की तानाशाही, गैर कानूनी रूप से महिलाकर्मी को नौकरी से निकाला

0
108
  • राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति पर महिलाकर्मी से भेदभाव का आरोप
  • राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के अध्यक्ष रमेश थानवी पर महिलाकर्मी ने लगाया गंभीर आरोप
  • संस्थान की इमारत को हड़पने का प्रौढ़ शिक्षण समिति के अध्यक्ष पर लगा आरोप

राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति की तानाशाही सामने आई है. अध्यक्ष और सचिव के तुगलकी फरमान जारी कर महिलाकर्मी को ऐसे वक्त में नौकरी से बाहर निकाल दिया जब राजस्थान सहित पूरे देश में कोरोना महामारी का आतंक बढ़ता ही जा रहा है.

मनमानी का शिकार हुई रचना सिद्धा पिछले 25 सालों से संस्था में काम कर रही थीं लेकिन संस्था ने बिना कारण बताए उन्हे अचानक नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.

मौजूदा कार्यकारिणी के फैसले पर उठा सवाल

इस सिलसिले में जानकारी देते हुए पीड़ित रचना का कहना है कि वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो गया है. लेकिन कोरोना महामारी की वजह से नई कार्यकारिणी का चुनाव नहीं हुआ है.

इसी कार्यकारिणी को वैकल्पिक तौर कामों का संचालन करने की जिम्मेदारी दी गई है. लेकिन इस कार्यकारिणी के अध्यक्ष और सचिव ने बिना बताए मनमाने तरीके से मुझे नौकरी से निकाल दिया जो गैर कानूनी है.

यह भी पढे: #Column: ताली और थाली बजाने की नीति की वजह से गुजरात गंभीर परिस्थिति में

उन्होंने कहा कि अध्यक्ष और सचिव के पास संस्था में नीतिगत फैसला लेने का अधिकार नहीं है बावजूद इसके अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नौकरी से निकालना गैर कानूनी है.

वेतन भी नहीं देने का लगाया आरोप

इतना ही नहीं रचना ने मौजूदा कार्यकारिणी पर प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया उन्होंने कहा कि महिला होने की वजह से उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है.

17 महीने का वेतन भी नहीं दिया. रचना ने कहा कि अन्य कर्मचारियों को इस दौरान वेतना दिया गया लेकिन मुझे वेतन से वंचित रखा गया जिसकी वजह आर्थिक परेशानियों से दो-चार होना पड़ा.

शिक्षण समिति के अध्यक्ष की सफाई पर पलटवार

राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के अध्यक्ष रमेश थानवी रचना के आरोपों का खंडन करते हुए कहते हैं कि संस्था आर्थिक परेशानी की वजह से उन्हें नौकरी से निकाला है.

लेकिन रचना ने उनकी सफाई पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि अगर संस्था धनाभाव की वजह से यह कदम उठाया है तो फिर मौजूदा कार्यकारिणी के कुछ चहते लोगों की वेतन कैसे बढ़ा दी गई.

इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि समिति की पुरानी गाड़ी होने के बावजूद 12 लाख की नई गाड़ी क्यों खरीदी गई.

यह भी पढे: गहलोत सरकार द्वारा प्रशासनिक अमले में बदलाव, कार्मिक विभाग ने जारी किए आदेश

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यक्ष रमेश थानवी समिति को अपने घर की दुकान समझ रहे हैं और मनमाने तरीके से फैसला ले रहे हैं.अध्यक्ष रमेश थानवी के इस फैसले से कर्मियों का कहना है कि वह समिति को हड़पना चाहते हैं. इसीलिए वह धीरे-धीरे पुराने कर्मियों गैर कानूनी तरीके से नौकरी से निकाल रहे हैं.

एक अन्य कर्मी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि संस्थान की इमारत करोड़ों की है इसलिए थानवी इसे हड़पना चाहते हैं.

संस्था से जुड़े कर्मियों ने राजस्थान सरकार से मांग किया कि जिस उद्देश्य को लेकर इसे शुरू किया गया था उससे संस्था भटक गई है.

इसलिए अब सरकार को जमीन अपने कब्जे में कर लेना चाहिए और इमारत को किसी अन्य काम के लिए इस्तेमाल करना चाहिए.