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निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस उलझन में

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निकाय चुनाव टालने की राज्य सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने के बाद भले ही कांग्रेस नेता दावे कर रहे हों कि वे चुनाव के लिए पूरी तैयार हैं लेकिन हकीकत कुछ और है।

चुनावी तैयारियां तो दूर की बात है पार्टी के मंत्री-विधायकों की अभी चुनाव कराने को लेकर दिलचस्पी नहीं है। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के डर से भी मंत्री-विधायक चुनाव टालना चाहते हैं। अगर इसी माह चुनाव तारीखों का ऐलान होता है, उनके घरों में टिकट के इच्छुक दावेदारों और कार्यकर्ताओं की भीड़ लगेगी। साथ ही कोरोना के प्रकोप के बीच मंत्री-विधायकों को चुनाव प्रचार और जन सभाओं के लिए विभिन्न वार्डों और इलाकों में जाना पड़ेगा।

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वहीं दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेता चाहते हैं कि निकाय चुनाव जल्द हो, जिससे स्थानीय स्तर पर वार्डों के विकास के काम हों। वार्डों में विकास के काम नहीं होने से जनता को परेशानी हो रही है।

अधिकांश निकायों का कार्यकाल समाप्त हुए एक साल से ज्यादा का वक्त हो गया है, जिससे विकास के काम ठप्प पड़े हैं, साथ ही स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को छोटे-छोटे काम कराने के लिए भी अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

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लेकिन अगर इसी माह चुनाव कराए जाते हैं तो चुनाव में पार्टी आधी अधूरी तैयारियों के साथ ही उतरेगी। न तो प्रदेश कांग्रेस लेकर ब्लॉक लेवल तक संगठन में नियुक्तियां की गई हैं और न ही निकाय चुनाव को लेकर पार्टी में कोई तैयारियां शुरू हुई हैं, जबकि चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओं के नाम संगठन के निचले स्तर से भेजे जाते हैं। इस समय न तो ब्लॉक स्तर पर संगठन है और न ही जिला लेवल पर। ऐसे में कांग्रेस आधी-अधूरी तैयारियों से चुनाव मैदान में जाएगी।