Rajasthan Exclusive > राजस्थान > पहली बार बाज़ार आया गाय के गोबर से बना दीया

पहली बार बाज़ार आया गाय के गोबर से बना दीया

0
147

गोबर के दीए से इस बार घर-आंगन रोशन करने की तैयारी है। पर्यावरण संरक्षण और महिला स्वयं सहायता समूहों को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में गोबर से बने दीए को अहम माना जा रहा है। रंग-बिरंगे गोबर के ये दीए पहली बार बाजार में आए हैं। राजधानी जयपुर सहित बीकानेर, भीलवाड़ा, श्रीडूंगरगढ़ शहरों की गोशालाओं में गाय के गोबर से दीपक बनाने का कार्य तेजी से हो रहा है।

सांगानेर में टोंक रोड स्थित श्रीपिंजरापोल गोशाला स्थित सनराइज ऑर्गेनिक पार्क में गाय के गोबर से दीपक बनाने के लिए हैनिमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी से जुड़ी महिलाओं ने इस दिशा में अभिनव पहल की है। कुछ समय पहले तक यहां पर दर्जनों महिलाएं ऑर्गेनिक पार्क की औषधीय खेती करती थी।

इन्हीं महिलाओं ने गाय के गोबर को आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत करने का जरिया बना लिया। ये महिलाएं आकर्षक दीए बनाने के साथ-साथ लक्ष्मीजी व गणेशजी की मूर्ति सहित कई तरह की कलात्मक चीजें भी बना रही हैं। इको फे्रंडली होने के चलते राज्य के अन्य शहरों और अन्य राज्यों से भी इसकी मांग आ रही है। इसके अलावा यहां महिलाएं बचे हुए गोबर चूर्ण और पत्तियों से ऑर्गेनिक खाद (वर्मी कम्पोस्ट) भी बना रही हैं।

यह भी पढे: निगम चुनाव के पहले चरण के लिए कल थमेगा प्रचार

हैनिमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी की अध्यक्ष मोनिका गुप्ता ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक गोमाता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास है, इसलिए हमारा लक्ष्य 25000 दीये बनाने का है। ताकि लोग गाय के गोबर के महत्व को जानें। उन्होंने बताया कि अब तक जयपुर सहित तेलंगाना, गुजरात, दिल्ली व हरियाणा से गाय के गोबर के दीयों की डिमांड बढ़ रही है। होलसेल में 250 रुपए प्रति सैकड़ा दीपक बिक रहे हैं। डिमांड के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। साथ ही गणेशजी और लक्ष्मी माता की मूर्ति भी इको फे्रंडली बनाई जा रही हैं।

सनराइज ऑर्गेनिक पार्क के संचालक डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि इस दीपक के जलने से घर में हवन की खुशबू महकेगी। इससे घर के वातावरण को पटाखों की गैस को कम करने में सहायक होगी। दीये को दीपावली में उपयोग करने के बाद जैविक खाद बनाने के उपयोग में लाया जा सकता है। दीये के अवशेष को गमला या कीचन गार्डन में भी उपयोग किया जा सकता है। इस तरह मिट्टी के दीये बनाने और पकाने में पर्यावरण को होने वाले नुकसान के स्थान पर गोबर को दीए को इको फे्रंडली माना जाता है।