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राजस्थान विश्वविद्यालय का अपना ही शिक्षक दूसरी बार बन सकता है कुलपति!

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जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय को अब जल्द ही स्थाई कुलपति मिल सकता है। कुलपति प्रो. आर.के. कोठारी कार्यकाल पूरा होने के बाद से राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर के कुलपति प्रो. जेपी यादव के पास 11 जुलाई से राजस्थान विवि के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार है।

राजस्थान विश्वविद्यालय ने कुलपति चयन के लिए गठित समिति ने पांच सदसीय पैनल का चयन का राजभव भेज दिया है।

अब किसी भी समय राजस्थान विश्वविद्यालय को स्थाई कुलपति लगाया जा सकता है। लेकिन पैनल में शामिल नामों को लेकर अभी से विवाद सामने आन लगा है। पैनल में शामिल पांच नामों से दो चार नाम प्रदेश के शिक्षकों के है, जिनमें से दो नाम तो राजस्थान विश्वविद्यालय सेवानिवृत शिक्षक है।

वहीं एक शिक्षक बिहार से जो अभी पटना के एक विश्वविद्यालय में कुलपति है। राजस्थान विश्वविद्यालय को एक बार फिर लगातार दूसरी बार अपने ही सेवानिवृत शिक्षक के रूप में कुलपति मिल सकता है। इससे पूर्व में कुलपति प्रो. आरके कोठारी भी राजस्थान विश्वविद्यालय से ही थे।

सूत्रों की माने तो चयन समिति ने 19 अगस्त को कुलपति के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक एमएस पुनियां और जगदीश प्रसाद, कोटा के प्रो. राजीव जैन और जोधपुर के एमएल वाड्रा सहित पटना के पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गुलाबचंद राम जायसवाल बंद लिफाफे में राजभवन भिजवाया है। पैनल में शामिल नामों पर अभी से सवाल उठने लगे है।

पैनल में शामिल राजस्थान विश्वविद्यालय से सेवानिवृत एक शिक्षक का उप-प्रार्चाय पद पर रहते सीए की कॉपियां संविदा कर्मियों एवं रिसर्च स्कॉलर्स से जंचवाने के मामले को लेकर भी विवादों में रहे है। जानकारी में यह भी सामने आया है कि इस शिक्षक को एसएफएस कोर्स में नियम विपरित अधिक कक्षाएं लेने के मामले में जांच समिति ने दोषी पाया था।

वहीं इनका प्रो. पद का अनुभव भी छह साल का बताया जा रहा है। ऐसे में पैनल द्वारा भेजे गए नामों पर सवाल खड़े होने लगे है।

आरयू के शिक्षकों का दावा मजबूत, विवि में फिर होगी नजदिकियों की लॉबिंग

राजस्थान विश्वविद्यालय के दो शिक्षकों के पैनल में नाम शामिल होने से लगातार दूसरी बार आरयू में उसी के सेवानिवृत शिक्षक कुलपति पद लगाया जा सकता है। लेकिन ऐसा होने पर विश्वविद्यालय के नए कुलपति का कार्यकाल भी विवादों में रह सकता है।

कुलपति प्रो. कोठारी के कार्यकाल में भी विवादों के साये में पूरा हुआ था। विश्वविद्यालय यहीं के शिक्षक को कुलपति लगाया जाता है तो नजदीकियों की लॉबिंग शुरू होनी की संभावना बढ़ जाएगी। ऐसा होता है तो विश्वविद्यालय में एक बार फिर नजदीकी लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर लगाने और योग्य व सीनियरटी की अनदेखी बढ़ सकती है।