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डायबिटीज, लिवर कैंसर के रोगी तथा उम्र दराज में कोरोना होने की संभावना अधिक

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  • कोरोना रोगियों के लिए संजीवनी बनी प्लाजमा थेरेपी

  • महात्मा अस्पताल में वेबीनार में विशेषज्ञों ने दी जानकारी

  • कोरोना के प्रभाव से मुक्त हो चुके व्यक्ति प्लाज्मा डोनेट कर सकता है

जयपुर: प्लाज्मा थेरेपी उपचार के लिए पहले भी काम में ली जाती रही है इस समय प्रयोग के तौर पर कोरोना रोगियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है ।

यह जानकारी महात्मा गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के निदेशक डॉ राम मोहन जायसवाल ने दी। डॉ जायसवाल शुक्रवार को कोविड-19 के उपचार में प्लाज्मा थेरेपी विषय पर आयोजित ऑनलाइन मीटिंग को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कोरोना वायरस मुक्त होने के बाद अपना प्लाज्मा डोनेट कर गंभीर स्थिति में कोरोना रोगी को जीवनदान भी दे सकता है। उन्होंने बताया वर्तमान में कोरोना से ठीक होने हो चुके केवल 2% रोगी प्लाज्मा डोनेट के लिए आगे आ रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में कोरोना रोगियों को इसकी आवश्यकता है।

कोरोना के प्रभाव से मुक्त हो चुके व्यक्ति 18 से 50 आयु वर्ग का व्यक्ति 28 दिन बाद प्लाज्मा डोनेट कर सकता है । वेबीनार में अस्पताल के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ रजत बोहरा ने कहा कि भारत में वर्तमान में कोरोना के 29 लाख व्यक्ति संक्रमित हैं। जिनमें से 55000 की अकाल मृत्यु हो चुकी है।

राज्य में लगभग 67000 कोरोना पॉजिटिव में से 50 हजार ठीक हो चुके है। डायबिटीज, लिवर कैंसर रोग के रोगी तथा उम्र दराज कोरोना पॉजिटिव होने की संभावना अधिक है। इस अवसर पर मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ फिजिशियन डॉक्टर किशोर मुलरजानी ने कहा कि सांस लेने में परेशानी, बुखार, सिर दर्द खांसी गले में खराश कमजोरी कोविड-19 लक्षण है। इसके लिए समय-समय पर बुखार की जांच ऑक्सीजन लेवल की जांच की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा महात्मा गांधी अस्पताल में जो रोगी कोरोना का अपने घर पर बैठे इलाज लेना चाहे तो उनके लिए महात्मा गांधी अस्पताल में सुरक्षा एट होम का पैकेज भी उपलब्ध है।