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हाथरस की घटना को लेकर कांग्रेस का दो घंटे का मौन सत्याग्रह

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उत्तरप्रदेश के हाथरस की घटना के विरोध में राजस्थान कांग्रेस सोमवार को जिला मुख्यालयों पर सुबह दो घंटे का मौन सत्याग्रह करेगी और पीड़ित परिवार के लिये न्याय की मांग करेगी. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने ट्वीट किया, उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित युवती के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ कांग्रेस पार्टी योगी आदित्यनाथ के द्वारा की जा रही मनमानी और असंवैधानिक कृत्यों के जवाब में पांच अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक मौन सत्याग्रह करेगी और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करेगी.

डोटासरा ने इस संबंध में सभी जिलाध्यक्षों एवं जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर सोमवार को सुबह 10 बजे से 12 बजे तक सभी जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आम्बेडकर की प्रतिमा के सामने शांतिपूर्ण मौन सत्याग्रह करने का निर्देश दिया.

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हाथरस के बहाने UP में दंगा कराने की साजिश

उत्तर प्रदेश के हाथरस में गैंगरेप पीड़िता की मौत हो चुकी है. लेकिन इस मामले को लेकर पूरे देश में गुस्से का माहौल देखने को मिल रहा है.

मामले में चौतरफा विवादों में घिरी योगी सरकार ने अब मामले को लेकर एक बड़ा दावा किया है. सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया है कि हाथरस मामले की आड़ में उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर जातीय दंगा कराने की योजना बनाई गई थी.

दंगा को अंजाम तक पहुंचाने के लिए रातों-रात एक वेबसाइट भी बना दी गई थी.

जस्टिस फॉर हाथरस नामक बनाई गई वेबसाइट

उत्तर प्रदेश सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगी जानकारी के अनुसारी मोदी और योगी सरकार की छवि खराब करने के लिए जस्टिस फॉर हाथरस नामक एक वेबसाइट रातों रात तैयार की गई थी.

इतना ही नहीं इसके साथ हजारों को लोगों को जोड़ा भी गया था. इस वेबसाइट में यह भी बताया गया है कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में कैसे दंगा कराया जा सकता है और दंगा की आग भड़कने के बाद कैसे बचा जा सकता है.

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सीएम योगी ने ट्वीट कर दी जानकारी

मामला सामने आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा” जिन्हें विकास अच्छा नहीं लग रहा है. वह जातीय और सांप्रदायिक दंगा भड़काना चाहते हैं.

इन दंगों की आड़ में उन्हें राजनीतिक रोटियां सेंकने का अवसर मिलेगा. इसलिए वे नित नए षड्यंत्र करते हैं. इन षड्यंत्रों के प्रति पूरी तरह आगाह होते हुए हमें विकास की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना है.”

UP सुरक्षा एजेंसियों के दावा के अनुसार मदद के नाम पर हिंसा फैलाने के लिए इस वेबसाइट के जरिय फंडिंग का भी इंतजाम किया जा रहा था.

जिसमें PFI, SDPI जैसे संगठन जो एनआरसी के खिलाफ हिंसा में शामिल थे.