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राजस्थान में बारिश की बेरुखी ने किसानों-सरकार की बढ़ाई चिंता

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जयपुर: प्रदेश में बारिश की बेरुखी ने किसानों और कृषि विभाग की चिन्ता बढ़ा दी है।

हालांकि पिछले 2-3 दिन से मानसून मेहरबान है लेकिन अगर ये सिलसिला अगले एक महीने तक यूं ही बरकरार नहीं रहा तो मौजूदा खरीफ सीजन के साथ ही आगामी रबी सीजन पर भी बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक अभी मक्का, बाजरा,सोयाबीन, मूंग,मोठ,उड़द और ज्वार आदि फसलें वानस्पतिक बढ़वार और फ्लॉवरिंग स्टेज पर हैं।

इन दिनों में फसल को ज्यादा पानी की जरुरत होती है।

अभी तक जितनी बारिश हुई है वो फसल को जिन्दा रखने में तो कारगर रही है लेकिन यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल की बढ़वार और दाने पर असर पड़ेगा।

यानि अगर बारिश की बेरुखी बरकरार रही तो उत्पादन पर विपरीत असर पडऩा तय है।

वहीं अगर अगले एक महीने अच्छी बारिश होकर जमीन में नमी नहीं रही और बांध-तालाब नहीं भरे तो रबी सीजन में गेहूं-चना आदि फसलों का स्कोप भी कम हो जाएगा।

उधर बारिश की बेरुखी के चलते कृषि विभाग द्वारा तय किया गया बुवाई का टारगेट भी अब पूरा होने की उम्मीदें बेहद कम नजर आ रही हैं।

जुलाई माह के अंत तक किसानों ने बुवाई को लेकर अच्छा उत्साह दिखाया लेकिन उसके बाद भी बारिश की बेरुखी बने रहने से बुवाई की गति मंदी पड़ गई।

प्रदेश में इस बार 1.63 करोड़ हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य है जबकि 5 अगस्त तक 1.29 करोड़ हैक्टेयर में बुवाई हो पाई है जो कि लक्ष्य का 79.2 प्रतिशत है।

10 अगस्त तक बुवाई की उम्मीदें रहती हैं

जुलाई के अंत तक बुवाई का आंकड़ा पिछले साल से आगे चल रहा था लेकिन अब वह गत वर्ष के मुकाबले करीब 5 लाख हैक्टेयर कम हो गया है।

खास तौर से पश्चिमी राजस्थान के जिलों बीकानेर,चूरू,जैसलमेर और बाड़मेर आदि में ग्वार,मोठ और बाजरा की बुवाई का आंकड़ा कम है।

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रामगोपाल शर्मा का कहना है कि 10 अगस्त तक बुवाई की उम्मीदें रहती हैं।

अगर पश्चिमी राजस्थान में इस अवधि में अच्छी बारिश का दौर जारी रहता है तो बुवाई का रकबा बढने की उम्मीदें हैं जिससे टारगेट पूरा हो पाएगा लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो टारगेट पूरा होना मुश्किल है।

बारिश ने लम्बा अंतराल लिया तो फसल पर विपरीत असर पड़ेगा कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बारिश का कम होना चिन्ता की वजह है लेकिन सुकून की बात यह है कि अभी तक की बारिश फसल को बचाने में कामयाब रही है और फसल की स्थिति अच्छी है लेकिन अब एक महीने अच्छी बारिश होना जरूरी है।

यदि अब बारिश ने लम्बा अंतराल लिया तो फसल पर विपरीत असर पड़ेगा।

25 जिलों में कम बारिश

गौरतलब है कि अभी तक प्रदेश के 33 में से केवल 8 जिले ऐसे हैं जिनमें औसत बारिश हुई है।

इनमें भरतपुर,चूरू,जैसलमेर,जोधपुर,करौली,नागौर, राजसमंद और सीकर शामिल है।

वहीं प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से कम हैं।

जल संसाधन विभाग द्वारा जिन 450 स्टेशनों पर बारिश का आंकड़ा दर्ज किया जाता है उनमें से 414 पर बारिश औसत से कम दर्ज की गई है।