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राजस्थान में लगातार कम हो रही ऊंटों की संख्या

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  • कहीं खत्म नहीं हो जाए राजस्थान का जहाज, लड़ रहा अस्तित्व की लड़ाई

  • पहले 3.26 लाख ऊंट थे और अब 2.13 लाख रह गए

जयपुर: ऊंट को राजस्थान का जहाज माना जाता है लेकिन अब ऊंट (The number of camels is decreasing) अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। पिछले पांच साल में 35 प्रतिशत ऊंट कम हो गए हैं। देश में जितने ऊंट (The number of camels is decreasing) है उनमें से 80 फीसदी ऊंट राजस्थान में ही है। 2014 में ऊंट को राज्य पशु घोषित किया था लेकिन संरक्षण के अभाव में पशुपालक मुंह मोड़ रहे हैं। प्रदेश में ऊंटों की मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। 20वीं पशुगणना के अनुसार ऊंटों की संख्या में 34.69 प्रतिशत कमी आई। पहले 3.26 लाख ऊंट (The number of camels is decreasing) थे और अब 2.13 लाख रह गए।

ऊंट पालकों ने बताया कि सरकारी प्रोत्साहन नहीं के बराबर है। ऐसे में कोई ऊंट (The number of camels is decreasing) क्यों पालेगा। राज्य में ऊंट संरक्षण के लिए चलाई जा रही योजनाएं पिछले छह महीने से बंद पड़ी हैं। इसके कारण पशुपालकों को अनुदान व अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही। ऊंटनी के दूध को सऊदी अरब, यूएई, ऑस्ट्रेलिया सहित दर्जन भर देशों में दवाइयों सहित मिल्क शेक के रूप में काम में ले रहे हैं। इसमें विभिन्न प्रकार के खनिज तत्व, विटामिन्स होते हैं।

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मंदबुद्धि बच्चों के दिमागी विकास, मधुमेह, कैंसर, विभिन्न संक्रमण, भारी धातु विषाक्तता, कोलाइटिस और शराब से प्रेरित विषाक्तता के रोगों में दवा के रूप में काम ले रहे हैं। गुजरात के कच्छ में पाया जाना वाला खाराई ऊंट समुद्री पानी में भी 5.7 किलोमीटर बिना किसी सहारे के चल सकता है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उंटपालकों को नवीन बीमारियों की जानकारी नहीं है। ऊंटों (The number of camels is decreasing) के लिए बनी योजनाओं का धरातल पर कम उतरना भी एक प्रमुख कारण है।

यह है मुख्य कारण

ऊंट (The number of camels is decreasing) कम होने के कारणों में चारागाह कम होने, उष्ट्र विकास योजना बंद होनेए तस्करी व उनका वध अधिक होना शामिल है । सरकार द्वारा पशुपालकों को प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण भी इनकी संख्या में कमी हो रही है। राष्ट्रीय ऊंट विकास योजना अस्थाई तौर से बंद ऊंट (The number of camels is decreasing) सरक्षंण के लिए केटल डवलपमेंट स्किम के तहत पशुपालक को नजदीकी पशु चिकित्सालय में पंजीयन करवाने एवं ऊंट के बछड़ा पैदा होने पर ऊंटपालक के सीधे बैंक अकाउंट में तीन किस्तों में दस हजार रुपए प्रदान करने की योजना पर अघोषित रोक है।