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जैसलमेर में गरीबों को नहीं मिल रहा खाद्य सुरक्षा का लाभ, अमीर उठा रहे सारा राशन

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जयपुर: जैसलमेर जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़े-बड़े मकान,महंगी गाडिय़ों में चलने वाले लोग और सरकारी तनख्वाह उठा रहे लोग गरीब हैं? जिले में खाद्य सुरक्षा में जुड़े लोगों के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं क्योंकि जैसलमेर में 50 प्रतिशत से भी अधिक राशनकार्ड खाद्य सुरक्षा में जुड़े हुए हैं। सरकारी नियमों की शिथिलता या फिर कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के चलते गरीबों के हिस्से का गेहूं पूरी तरह से इन गरीबों तक नहीं पहुंच पा रहा है और सक्षम लोग गरीबों के मुह के निवाले पर गिद्ध दृष्टि जमाये बैठे हैं।

राज्य और केन्द्र सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों के लिये खाद्य सुरक्षा योजना आरम्भ की थी ताकि देश व प्रदेश में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोये लेकिन गरीबों के इस निवाले पर सरकारी लापरवाही पूरी तरह से भारी पड़ती दिखाई दे रही है जिसमें कई सक्षम लोग जिनके पास आलीशान मकान और महंगी गाडि़य़ां हैं,वो भी इस योजना के गेहूं पर हाथ साफ करते दिख रहे हैं।

बात करें अगर आंकड़ों की तो जैसलमेर जिले में 1 लाख 99 हजार 527 राशन कार्ड बने हुए हैंए जिसमें 1 लाख 1 हजार 666 राशन कार्ड खाद्य सुरक्षा की श्रेणी में आते हैं और सरकार द्वारा अनुदानित दर पर इन्हें गेहूं का आवंटन किया जाता है। आंकड़ों की मानें तो जैसलमेर में 50 प्रतिशत से अधिक लोग गरीब की श्रेणी में आते हैं जो कि किसी भी तरह से गले उतरने वाली बात नहीं लग रही है। मामले पर जब पड़ताल की गई तो पाया गया कि कई लोग पूरी तरह से सक्षम होने के बाद भी इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
ईमानदारी से हो राशनकार्डों की जांच

खाद्य सुरक्षा की श्रेणी में आकर सरकार द्वारा रियायती दर पर गेहूं उठाने के मामलों में रसद विभाग द्वारा गंभीरता से जांच किये जाने की आवश्यकता नजर आ रही है ताकि पात्र लोगों को इस योजना का पूरा लाभ मिल सके और अपात्र लोगों को सूची से बाहर कर उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए लेकिन हर बार की तरह शिकायत होने पर विभाग द्वारा खानापूर्ति के तौर पर केवल सरकारी और अद्र्धसरकारी सेवा में लगे कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और उनसे वसूली के आंकड़े दिखाकर इतिश्री कर ली जाती है।