Rajasthan Exclusive > राजस्थान > ऊषा शर्मा का मुख्य सचिव बनना लगभग तय

ऊषा शर्मा का मुख्य सचिव बनना लगभग तय

0
131

मुख्य सचिव राजीव स्वरूप 31 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं. इसलिए प्रदेश के नए मुख्य सचिव (Usha Sharma latest news) को लेकर नौकरशाही में तलाश शुरू हो गई है. अगला मुख्य सचिव (Usha Sharma latest news) कौन होगा, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. ऐसे में सूत्रों की माने तो ऊषा शर्मा (Usha Sharma latest news) का अब मुख्य सचिव बनना लगभग तय हो गया है.

पहले तो राजीव स्वरूप के एक्शटेंशन की प्रबल संभावना थी, लेकिन अब शायद सरकार का मानस बदल रहा है. यदि ऊषा शर्मा (Usha Sharma latest news) को ही अगला मुख्य सचिव बनना है तो फिर राजीव को तीन माह का एक्सटेंशन देने का क्या अर्थ है? फिर नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा एक्सटेंशन को मंजूरी दिए जाने की भी संभावना बहुत कम ही है.

ऐसे में यदि ऊषा शर्मा (Usha Sharma latest news) मुख्य सचिव बनती हैं तो फिर मई, 2023 तक शायद वही इस पर पर रहेंगी. ऊषा, डॉ. सीपी जोशी की निकट रिश्तेदार है. हालांकि सीपी ने आज तक ऐसे मामलों में किसी की सिफारिश नहीं की, लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात के चलते ऊषा की उम्मीदवारी को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा. फिर एक महिला को मुख्य सचिव (Usha Sharma latest news) बनाने का अवसर गहलोत भी छोड़ना नहीं चाहते.

यह भी पढे: जयपुर संभाग का फीडबैक शुरू, पायलट कैम्प पर टिकी है सबकी निगाहें

सरकार से जुड़े सूत्रों की माने तो इस बार किसी वरिष्ठ महिला आईएएस अफसर को राज्य का मुख्य सचिव बनाए जाने की चर्चा है. सरकार में वरिष्ठ महिला आईएएस अफसरों के नामों पर मंथन भी चल रहा है, और कुर्सी की इस दौड़ में उषा शर्मा को सबसे आगे बताया जा रहा है.

जयपुर शहर से करीब 80 नेता आए s

फीडबैक के लिए सबसे ज्यादा नेता जयपुर शहर और जयुपर देहात से ही आए क्योंकि जयपुर जिले में ही सबसे ज्यादा पार्टी पदाधिकारी रहते हैं। जयपुर शहर से करीब 80 और जयपुर देहात से 70 नेता फीडबैक कार्यक्रम में बुलाए गए। बाकी हर जिले से 50-50 के करीब नेताओं को बुलाया गया है। इनमें हर जिले से विधायक, विधायक उम्मीदवार, सांसद उम्मीदवार, एआईसीसी पदाधिकारी और सदस्य, पूर्व पीसीसी पदाधिकारी, निवर्तमान जिलाध्यक्ष, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, पीसीसी सदस्य और सहवृत सदस्य समेत प्रकोष्ठों के निवर्तमान प्रदेशाध्यक्षों को बुलाया गया है।

पायलट कैम्प पर निगाहें

जयपुर संभाग के फीडबैक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सचिन पायलट कैम्प के नेता भी आए। पायलट के पुराने निर्वाचन क्षेत्र दौसा से भी बड़ी संख्या में नेता फीडबैक देने आएंगे। पायलट कैम्प के नेताओं के रुख पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। अजमेर संभग के फीडबैक कार्यक्रम के दौरान जिस तरह पायलट कैम्प के समर्थकों ने नारेबाजी की उसके बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हैं। फीडबैक कार्यक्रम में सत्ता खेमे और पायलट कैम्प के नेताओं के रुख पर कांग्रेस की आगे की सियासत निर्भर करेगी।

पायलट कार्यकर्ताओं में पकड़ करेंगे मजबूत

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थकों को एकजुट करने की कवायद में जुटे हैं।

उन्होंने अपने समर्थकों से टेलिफोन पर संपर्क साधना शुरू कर दिया हैं।

इसके साथ ही पायलट के खास विधायक लगातार कार्यकर्ताओं से संपर्क साध रहे हैं।

माना जा रहा है, कि पायलट प्रदेश की यात्रा करेंगेऔर प्रदेश के सभी 33 जिलों का दौर करके अपने समर्थकों से बात करेंगे तथा अपनी पकड़ को और अधिक मजूत करने का कार्य करेंगे।

इसकी शुरूआत पूर्वी राजस्थान से होगी।

यह भी पढे: जयपुर के अखिल सहित तीन कोटा के छात्रों ने प्राप्त किए 100 परसेंटाइल

पूर्वी राजस्थान के आधा दर्जन जिलों में पायलट की पकड़ मजबूत है।

इन जिलों में गुर्जर और मीणा मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं।

इनमें टोंक, दौसा,करौली,सवाईमाधोपुर,भरतपुर व अलवर जिले शामिल है।

पायलट फिलहाल सरकार में है और न ही संगठन में हैं।

अभी वे कांग्रेस के नेता और विधायक जरुर हैं।

ऐसे में पायलट के इन दौरों के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।

क्या पायलट बगावत और घर वापसी के बाद जनता के बीच अपने समर्थन का पारा नापने के लिए दौरे करेंगे या दौरों से जनसमस्याएं सुनकर गहलोत और अपनी ही पार्टी की सरकार पर जनता के काम का दबाब बनाएंगे।

फिलहाल पायलट ने इस पर अपनी रणनीति साफ नहीं की है।

पायलट की इस मंशा से साफ है कि उनकी घर वापसी से संघर्ष विराम जरुर हुआ लेकिन शीत युद्ध खत्म नहीं हुआ है।

कांग्रेस आलाकमान ने दोनों के बीच संतुलन और समन्वय की ठोस कोशिश नहीं की तो भविष्य में भी किसी संकट से इंकार नहीं किया जा सकता।